पशुओं की इन बीमारियों का उपचार है टिम्पोल

पशुओं में विशेष रूप से गाय, भैस, भेड़, तथा बकरी आदि में अफारा हो जाना एक आम बीमारी है। पशुओं के द्वारा सड़ा- गला दाना, जहरीले पौधे, बारीक दाना या हरा चारा अधिक मात्रा में खा लेने पर उनके पेट में गैस अधिक बनने लगती है व गैस के बाहर न निकल पाने के कारण पेट दर्द तथा अफरा हो जाता है।  इस दशा में पशु का पेट फूल जाता है, सांस लेने में तकलीफ होती है व बेचैनी होने लगती है। अफारे का यदि सही उचार समय पर न किया जाए तो प्रायः पशु की मृत्यु हो जाती है। इन बीमारियों से बचने के लिए हम आपको कुछ उपायों के बारे में जानकारी दे रहे हैं जिनसे आपको ये समस्या नहीं होगी साथ ही आपके पशुओं की सेहत भी ठीक रहेगी।

किस वजह से होती हैं पशुओं को ये बीमारियां उनके कारण भी जानने बहुत जरूरी है:

  • ग्रास नली यानि खाने की नली में किसी चीज का फंस जाना।
  • दूषित आहर खाना।
  • बार—बार पशुओं के आहार मे परिवर्तन
  • ज्यादा कार्बोहाइड्रेट युक्त चीजों का सेवन करना
  • ओस का चारा पशुओं को खिलाना।
  • अधिक अनाज पशुओं को खिलाना आदि।

टिम्पोल के फायदे पशुओं की सेहत के लिए -Timpol Ayurvedic Veterinary Medicine in Hindi

औषध गुण

टिम्पोल दो तरीके से असर करने वाली अफारे कि विश्वसनीय औषधि है। टिम्पोल ने केवल पेट में आगे अधिक गैस बनना भी रोकता है। इसके अलावा टिम्पोल हाजमा भी ठीक करता हैै। यह दवा अफारे के करण और प्रभाव दोनों को उपचार कर पशु को तुरन्त आराम पहुंचाता है।
खुराक प्रयोग विधि
गाय, भैस, घोडे़ 60 ग्रा.
गाय, भैस, तथा घोड़े के बच्चे 40 ग्रा.
भेड़ बकरी व सूअर 20-25 ग्रा.
टिम्पोल चैथाई ली. गुनगुने पानी में उपरोक्त मात्रा  के अनुसार घोलकर दिन में दो बार देना चाहिए। यदि झाग वाला अफारा हो तो उपरोक्त के साथ एक पाव अलसी का तेल मिला कर देना चाहिए।
अफरा अधिक होने पर टिम्पोल प्रत्येक 3-4 घंटे में एक खुराक देना चाहिए।
पेट में बंद होने पर टिम्पोल के साथ 250 ग्राम जुलाबी नमक मिला कर दिन में दो बार देने से शीघ्र आराम होता है।
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