किसान भाई पशुओं के स्वास्थ पर विशेष ध्यान रखें

यह बीमारी सूक्ष्म विषाणु के कारण पैदा होती है। यह बीमारी भैंस, गाय, भेड़-बकरी, ऊंट आदि में तेजी से फैलता है। यह रोग बीमार पशु से सम्पर्क करने से, पानी, घास, दाना, बर्तन, दूध निकालने वाले व्यक्ति के हाथों से, हवा के द्वारा लोगों के आवागमन से फैलता है। रोग ग्रस्त पशु को 104-106 डि.फोरनहायट तक बुखार हो जाता है। तेज बुखार के कारण पशु के मुंह के अन्दर, गालों, जीभ, होंठ, तालू व मसूड़ों के अन्दर, खुरों के बीच तथा कभी-कभी थनों व अयन पर छाले पड़ जाते है। छाले फटने के कारण पशु को दर्द होता है और पशु खाना-पीना बन्द कर देता है। पशु लंगड़ाकर चलने लगता है। मुंह से लार आने लगता है। दुग्ध उत्पादन में कमी आ जाती है। इस रोग का कोई विशेष उपचार नहीं है। परन्तु लक्षणों के आधार पर उपचार के लिए एन्टीबायोटिक टीके लगाये जाते है। मुंह में बोरो-ग्लिसरीन तथा खुरों में किसी एंटीसेप्टिक लोशन या क्रीम का प्रयोग किया जाता है।
इस बीमारी से बचाव हेतु पशुओं को पोलिवेलेट वेक्सीन के वर्ष में दो बार टीके अवश्य लगवाने चाहिए। पहला टीका एक माह की उम्र में, दूसरा तीसरे महीने में और तीसरा 6 माह की उम्र में तथा फिर हर साल दो बार टीके अवश्य लगवायें। ध्यान रहे बीमार पशु को अन्य पशुओं से दूर ही रखें। पशुशाला को साफ सुथरा रखना चाहिए। पशुपालकों को दर्द निवारक दवाओं को हमेशा अपने पास रखना चाहिए। गाय, भैंस व उनके बच्चों को दिन में 4-5 बार पानी पिलाना चाहिए एवं छाया में बांधकर रखें। पशुओं में चिकन पाॅक्स, पैर, मुंह की बीमारियां तथा अफरा आम बात है। इनसे बचाव हेतु पशु चिकित्सक को दिखाते रहें।

निमोनिया/खांसी/सर्दी जुकाम- से बचाने के लिए पशु के ऊपर कपड़ा बांध दें। देशी दवा 250 ग्राम अडूसा के पत्ते, 100 ग्राम सौंठ, 20 ग्राम काली मिर्च, 50 ग्राम अजवाइन सभी को बारीक पीसकर 20 ग्राम पिसी हल्दी व आधा कि.ग्रा. गुड के साथ अच्छी तरह मिलाएं तथा इसके 6 लड्डू बना लें व पशुओं को दिन में तीन बार चटायें अथवा 100 ग्राम सुहागा का फूल, 200 ग्राम पिसी मुलेहटी को 500 ग्राम गुड़ के साथ मिलाकर उसके भी 6 लड्डू बना लें और दिन में तीन बार एक-एक लड्डू देने से भी आराम आता है। यह उपचार 4-5 दिन करें। यदि दुधारू पशुओं के थन कट या छिटक जाते हैं अत: धोने के बाद थनों पर जीवाणु नाशक मलहम/हल्दी में मिलाकर मक्खन लगा दें। दूध दोहने के समय थनांे की सावधानी पूर्वक सफाई करें।
दुधारू पशुओं को चारा व भूसा के साथ बरसीम की कुट्टी मिलाकर खिलाएं।
सभी पुशओं के लिए शुद्व पेयजल की व्यवस्था करें और दिन में एक बार नहलाएं। पुशओं में खुरपका व मुंहपका टीकाकरण यदि नही हुआ है तो इसकी उचित व्यवस्था करें।
फूल/शरीर दिखना (कांटा निकलना): पशु के ब्याने से पहले अथवा ब्याने के बाद यदि किसी पशु का फूल काटा निकलता है, तो उसको कलकारी (कलिहारी) की 40-50 ग्राम मात्रा सुबह शाम तीन दिन तक खिलानी चाहिए। इस बीमारी मे 200 ग्राम चैन सुपारी ंको पीसकर खिलाने से भी लाभ होता है।
पशुओं का बांझपन-यदि कोई पशु एक बार बच्चा देकर फिर समय पर ताव मे अथवा जाग में नहीं आता है, तो उन पशुओं को अंकुरित गेहंू की 1 किलो की मात्रा रोज 10 दिन तक खिलानी चाहिए तथा साथ में बिलावा का गुद्दा 200 ग्राम 5 दिन तक खिलानी चाहिये।

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