पशुओं में दुग्ध उत्पादन दवा “गैलन“

किसी भी दुधारू पशु की उपयोगिता इस बात पर निर्भर करती है कि वह कम से कम खर्च में कितना अधिक दूध देता है। यह पशु की नस्ल, उसे खिलाये जाने वाले चारे व रख रखाव आदि पर निर्भर करता है लेकिन उसके साथ-साथ पशु के दुग्ध-उत्पादन तंत्र के कुशलता से कार्य करने पर निर्भर करता है।
कभी-कभी बछड़े की मृत्यु, जेर न गिरने, मरा हुआ बच्चा होने, गर्भपात, किसी बीमारी के कुप्रभाव, सफर की थकान, मौसम के बदलाव आदि के कारण भी पशु का दुग्ध उत्पादन कम अथवा बिल्कुल बन्द हो जाता है। कभी-कभी ब्याहने के बाद अज्ञात कारणों से भी दूध उत्पादन घट जाता है।

पशुओं में दुग्ध उत्पादन दवा गैलन – Milk production drug gallon for animals

औषध गुण-

विशिष्ट जड़ी –

बूटियों पर रिसर्च के बाद तैयार किया गया उत्पादन गैलोग पशु से अधिकतम दुग्ध उत्पादन नियमित रूप से प्राप्त करने में अत्यंत सहायक है। गैलाग देने से पशु की दुग्ध ग्रंथियां तथा दुग्ध उत्पादन करने वाला पूरा तंत्र सक्रिय रूप से एवं कुशलता से कार्य करता है, जिसके कारण पोषक तत्वों का अधिकांश भाग दुग्ध -उत्पादन में उपयोग होता है। इस प्रकार उसी खाये गये चारे से पशु पहले से अधिक दूध देने लगता है।

गैलोग का प्रयोग बांक एवं थनों पर भी अनुकूल प्रभाव डालता है, जिसके कारण दूध दोहने मे सुविधा होती है। दुग्ध तंत्र के सही कार्य करने से पशु थनैला यानि थनों की सूजन की बीमारी से भी बचे रहते है। इन सभी फायदों को प्राप्त कने के लिये गैलोग एक ब्यांत में केवल 20 दिन तक खिलाने की जरूरत पड़ती है, जबकि दुग्ध उत्पादन में वृद्धि का लाभ गैलोग खिलाना बन्द करने पर भी ब्यांत तक बना रहता है।

किसी भी कारण से यदि पशु दुग्ध उत्पादन कम, अनियमित, अथवा बंद हो जाये तो उस दशा में 18-20 दिन तक गैलोग खिलाने से दुग्ध उत्पादन न केवल पूर्व स्तर पर आ जाता है बल्कि उसमें पशु क्षमता के अनुसार वृद्धि भी होता है, और वृद्धि नियमित रूप से बनी रहती है।
थनैला रोग में इसके विशिष्ट उपचार के साथ गैलोग खिलाने से पशु शीघ्र ठीक हो जाते है और अपने सामान्य दुग्ध उत्पादन पर आ जाता है।

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