पशुओं की बदहजमी व कमजोरी का उपचार कैसे करें

पशु का स्वास्थ्य एवं उत्पादकता उसे खिलाये जाने वाले चारे के अलावा इस बात पर भी निर्भर करती है कि उसका हाजमा कितना अच्छा है। यदि हाजमा अच्छा है तो खिलाये जाने वाले चारे का अधिकांश भाग पशु के स्वास्थ्य, कार्यक्षमता एवं उत्पादन को बढ़ाने व -सजाने में काम आता है। पशुओं में भूख न लगाना, बदहजमी, चारा न खाना अथवा कम खाना, एक आम स्थिति है। जो विभिन्न कारणों से पैदा हो जाती है। हाजमा ठीक न होने पर चारा कम खाया जाता है, जिसके फलस्वरूप पशु कमजोर हो जाता है और अपनी क्षमता के अनुसार उत्पादन तथा कार्य नहीं कर पाता है। अतः पशु के उत्तम स्वास्थ एवं उत्पादन हेतु यह आवश्यक है कि उसका हाजमा उच्चतम स्तर पर बना रहे। और उसकी सेहत भी दुरूस्त बनी रहे।

औषधी गुण-उचय- Treatment of indigestion and weakness of animals in Hindi

एच.बी. स्ट्रांग जड़ी बूटियों एवं लवणों से तैयार किया गया एक आदर्श फार्मूला है। एच.बी स्ट्रांग खिलाने से पशु की भूख बढ़ जाती है और खाया गया चारा पूरी तरह हजम होने से उसका स्वास्थ, कार्य क्षमता तथा उत्पादन व-सजय़ता है। सप्ताह में केवल 2-ंउचय 4 बार एच.बी. स्ट्रांग खिलाने से पशु का हाजमा उच्चतम स्तर पर बना रहता है, जिसके कारण नियमित रूप से अधिकतम उत्पादन प्राप्त होता है। इसके अतिरिक्त पशु बदहजमी,
भूख न लगना, चारा छोड़ देना आदि बीमारियों से बचा रहता है व पूरा उत्पादन देता है।

खुराक एवं प्रयोग विधि (Dosage & method used)

गाय, बैल, भैस, घोडे, एवं खच्चर – उचय 10 ग्राम ।
गाय, बैल, भैस, घोडे, एवं खच्चर – उचय 5 ग्राम।
भेड़, बकरी – उचय 2.5 ग्राम अन्य पशुओं को आयु व वनज के अनुसार।

उत्तम हाजमा, बेहतर स्वास्थ्य व अधिकतम उत्पादन के लिये ऊपर लिखी खुराक, प्रत्येक सप्ताह, दिन में एक बार, केवल दो दिन, चारे या पानी में मिला कर दें हाजमा ठीक न होन पर, दिन में दो बार, दो चार दिन तक दे।

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