पशुओं की अच्छी सेहत के लिए जरूर दें हिमालयन बतीसा

पशु का अच्छा स्वास्थ्य तथा उत्पादन बनाये रखने हेतु हिमालयन बतीसा खिलाना बहुत लाभदायक है। यह एक तरह की आयुवेर्दिक औषधि है। जिससे पशुओं की सेहत ठीक रहती है। इंसानों की तरह जानवर भी बीमार होते हैं। वे कुछ बोल नहीं पाते हैं एैसे में कई बार उनकी बीमारी का पता नहीं चलता है। लेकिन फिर भी कुछ लक्षणों से उनकी बीमारी का पता लगाया जाता है। एैसे में सही समय पर औषधि देना उनके अच्छे स्वास्थ के लिए बेहतर हो सकता है। इस लेख में हम आपको हिमालयन बतीसा के कुछ फायदे और कितनी मात्रा में इसे पशुओं को देना चाहिए इसके बारे में आपको बता रहे हैं।

उदर रोग नाशक-

जब भी पशु किसी कारण से बीमार पड़ता है तो उसका हाजमा कमजोर हो जाता है, चारा कम खाने की वजह से वह कमजोर होने लगता है और उत्पादन घटने लगता है। विभिन्न बीमारियों के उपचार के लिए जब रासायनिक अंग्रेजी दवाइयों का इस्तेमाल किया जाता है तो वे पशु की पाचन शक्ति को घटा देती है। इन सभी परिस्थितियों में जड़ी-बूटियों एवं लवणों से तैयार किया गया विश्व प्रसिद्ध हिमालयन बतीसा खिलाना बहुत लाभदायक है।

औषधी गुण-

हिमालयन बतीसा पशु की भूख तथा पाचन शक्ति को बढ़ाता है। अंग्रेजी दवाइयों के कारण पाचन शक्ति पर पड़ने वाले कुप्रभाव से उन्हें बचाता है। इतना ही नहीं, हिमालयन बतीसा पशु कमजोरी दूर करने तथा पुनः शीघ्र सामान्य स्वास्थ एवं उत्पादन स्तर पर लाने में मदद करता है। अतः किसी भी रासायनिक अंग्रेजी दवाई या इंजेक्शन आदि पशुओं में लगने पर उन्हें हिमालयन बतीसा अवश्य खिलाया जाना चाहिए।

खुराक एवं प्रयोग विधि-

गाय, बेल, भैस, घोड़, एवं खच्चर – 40 से 60 ग्राम
गाय, भैस तथा घोडे़ के बच्चे व सूअर – 20 से 30 ग्राम
भेड़, बकरी – 10 से 15 ग्राम
हिमालयन बतीसा ऊपर लिखी खुराक के मुताबिक गुड़, शीरे, आटे या चारे में मिलाकर पशु को दिन में दो बार देना चाहिए। स्वस्थ पशुओं को हिमालयन बतीसा एक सप्ताह में तीन बार या अर्थात् हर दूसरे दिन खिलाने से पशु स्वस्थ रहते है तथा अधिकतम उत्पादन देते है।

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