पशुओं में बलगम निकालने, जकड़न दूर करने एवं सांस के रोगों में शीघ्र आराम पहुंचाने वाली औषधि

सर्दी, बरसात में नमी होने पर तथा मौसम बदलने पर पशुओं को प्रायः ठंड लग जाने के कारण खांसी जुकाम हो जाता है। ऐसी अवस्था में फेफड़ों में बलगम जमा हो जाने तथा सांस की नली में सूजन आ जाने के कारण पशु को सांस लेने में तकलीफ होती है। नाक तथा आंख से पानी गिरने लगता है तथा धसका या खांसी उठती है और सांस तेज होने लगते है। इन परिस्थितियों में पशु बेचैनी अनुभव करता तथा उसके स्वास्थ एवं उत्पादन क्षमता में भारी कमी आ जाती है। यदि समय से उपचार न किया जाये तो बुखार (निमोनिया) भी हो जाता है।

पशुओं के बलगम और सांस के रोगों का उपचार -pashuo ke balagam ka upachar

औषध -गुण

“कैफलोन“ उपरोक्त दशाओं में अत्यंत लाभदायक है। “कैफलोन“ के उपयोग से खांसी व जुकाम ठीक हो जाता है, फेफड़ों में जमा बलगम निकल जाता है। इसके अतिरिक्त सांस नली की सूजन दूर होने से पशु सामान्य रूप से सांस लेने लगता है।
इसके साथ ही पशु सामान्य रूप से चारा खाने लगता है तथा उसका स्वास्थ एवं उत्पादन सामान्य स्तर पर बढ़ोतरी आ जाता है।

खुराक एवं प्रयोग विधि –

गाय, भैस व घोड़े – 30-40 ग्राम दें

भेड़ बकरी, गाय, भैस तथा घोड़े के बच्चे एवं सूअर – 6-12 ग्राम
ऊपर लिखी खुराक के मुताबिक “कैफलोन“ को शीरे या गुड़ अथवा गुनगुने पानी में चटनी बना कर दिन में 2-3 बार, पूर्ण स्वस्थ होने तक खिलायें।

सर्दी और खांसी लगने पर

इससे पशुओं की सांस की नली में सूजन आने के साथ—साथ बलगम आने लगता है।
एैसे में यदि आप उन्हें 250 ग्राम गुड के साथ एक तौला अजवायन और इतनी की मात्रा में सौंठ और नौसादर को मिलाकर पशुओं को दिन में कम से कम दो बार चाटाते हैं तो ये समस्या ठीक हो सकती है। इसके अलावा गुड को कैफलोन में मिलाकर दिन में दो बार पशुओं को चटाएं।

भूख कम लगने पर या कब्ज होने पर

आप पशुओं को नमक 200 ग्राम, सोंठ 30 ग्राम, शीरा 500 ग्राम के साथ मेगसल्फ 250 ग्राम की मात्रा लेकर पानी में में मिला लें। उसके बाद इसकी एक खुराक बड़े पशुओं को खिलाएं। बकरी, बछड़े और भेड को 2.5 ग्राम दिन में तीन बार खिलाएं।

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