थायोयूरिया ने किया कमाल— खुद किसान ने बताए इसके फायदे

मौहम्मद हुसैन, गाँव सुवाणा, तहसील-भीलवाड़ा के एक प्रगतिशील नवयुवक किसान है। कृषि के क्षेत्र में हर नई चीज को अपने खेत में लगाने के लिये आतुर रहता है। गत वर्ष 2011 मंे खरीफ के मौसम के अन्तर्गत मोहम्मद हुसैन ने बी.टी. कपास की बुवाई की थी, निरन्तर उन्ही खेतों मे तीन साल से लगातार कपास बोने से उसे आशानुरूप पैदावार नही मिली। कपास देर से कटने से गेहँू की बुवाई में पिछड़ गया। विकास खण्ड प्रभारी, सवाणा, श्री गोपाल सिंह से उसका सम्र्पक हुआ, गेहूं की समय से बुवाई न होने के कारण चिन्ता की लकीरे उसके माथे पर साफ दिखाई पड़ रही थी।

उसने अपनी चिन्ता का मुख्य कारण श्री गोपाल सिंह को बताया। गोपाल सिंह ने दिलासा देते हुये आश्वासन दिया कि एक खेत मे मेरे कहे अनुसार आपको कार्य करना है, देर से बुवाई के बाद भी समय से बोई गये अन्य किसानों की फसल से अच्छी पैदावार लेने मे सक्षम हो जाओगे।
श्री मोहम्मद हुसेन के दो खेत है। एक दो बीघे का दूसरा डेढ़ बीघे का, डेढ़ बीघे के खेत में उसने 20 कि.ग्रा. डी.ए.पी. व दो कट्टे यूरिया के प्रयोग किये, दो बीघा वाले खेत में 40 कि.ग्रा. डी.ए.पी. व 3 कट्टा यूरिया प्रयोग किया। डेढ़ बीघा वाले खेत में विकासखण्ड प्रभारी ने 50 दिन की फसल पर थायोयूरिया आधा ग्राम प्रति लीटर पानी में घोलकर दोपहर के तीन बजे बाद छिड़काव कराया, श्री गोपाल सिंह ने 15 दिन बाद फिर दूसरा छिड़काव थायोयूरिया का करने को कहा इसके बाद थायोयूरिया के खेत मंे औसत चार फृटान (टीलर) थे।

थायोयूरिया वाले खेत में नौ फुटान थी व दोनों खेतों की गेहूँ की बालियों के दानों की गिनती की गयी, बिना थायोयूरिया वाली बाली में 34 दाने एवं थायोयूरिया वाली बाली में 50 दाने निकले तथा मोहम्मद हुसेैन कह उठा थायोयूरिया ने चमत्कार कर दिया, यदि मैं थायोयूरिया दो बार छांट देता तो न जाने क्या चमत्कार होता।

मैं पास के किसानों को लाकर अपनी फसल को दिखा रहा हँू, मै तो कह ही रहा हूँ पड़ौसी किसान थायोयूरिया की फसल को डेढ़गुना अच्छी बता रहे है, उसने कहा कि मै सपने में भी नही सोच सकता कि 10 दिसम्बर को बोयी गई फसल थायोयूरिया के कारण इतनी जोरदार होगी। प्रति बीघा एक बार थायोयूरिया के छिड़काव मे 100 रूपये कीमत का थायोयूरिया लगा, अन्तिम परिणाम ज्यादा दूर नही है कम लागत में अधिक पैदावार लेने का यह बहुत ही आसान तरीका है, मै तो इसे अब मक्का, उड़द, गेहूँ, जौ, चना आदि फसलांे पर भी प्रयोग करुँगा।
थायोयूरिया के कारण फसलों में सूखा सहन करने की शक्ति बढ़ जाती है इससे पानी की बचत होती है, रबी की फसलों मे इसके प्रयोग से फसलों पर पाले का असर नही पड़ता है।

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