किसान अपने खेत में जिप्सम का उपयोग कर के उपज एवं आमदनी अधिक ले सकता है-

 

जिप्सम- पौध के लिए नत्रजन, फास्फोरस एवं पोटाश के बाद गंधक प्रमुख पोषक तत्व है। एक अनुमान के अनुसार तिलहनी फसलों के पौधों को फाॅस्फोरस के बराबर मात्रा में गंधक की आवश्यकता होती है। जैसे-तिलहनी, दलहनी व अनाज वाली फसलों (गेहूं, बाजरा, ज्वार) के उत्पादन की गुणवत्ता में बढ़ोत्तरी के साथ-साथ भूमि भी स्वस्थ रहती है। जिप्सम गंधक का सर्वोत्तम व सस्ता स्रोत है एवं राज्य में आसनी से उपलब्ध है।
राज्य में कृषकों द्वारा प्रायः गंधक रहित उर्वरक जैसे-डी.ए.पी. एवं यूरिया अधिक उपयोग किया जा रहा है और गंधकयुक्त सिंगल सुपर फास्फेट का उपयोग कम हो रहा है। साथ ही अधिक उपज देने वाली उन्नत किस्मों द्वारा जमीन से गंधक का अधिक उपयोग किया जा रहा है। एक ही खेत में हर वर्ष तिलहनी एवं दलहनी फसलों की खेती करने से खेतों मे गंधक की कमी हो जाती है।

Gypsum ke fayde

जिप्सम की मात्रा

गंधक की इस कमी को दूर करने एवं अच्छी गुणवत्ता का अधिक उत्पादन प्राप्त करने के लिए बुवाई से पहले 250 किलो जिप्सम प्रति हेक्. की दर से उपयोग करें। जिप्सम (70-80 प्रतिशत शुद्ध) में 13.5 गंधक तथा 16-19 प्रतिशत केल्शियम तत्व पाया जाता है। क्षारीय भूमि सुधार हेतु मिट्टी परीक्षण रिपोर्ट जिप्सम की आवश्यक मात्रा के अनुसार जिप्सम का उपयोग करना चाहिए।

तिलहनी फसलों में जिप्सम

राज्य में बोयी जाने वाली खरीफ की फसल मंूगफली, तिल, सोयाबीन एवं रबी की सरसों, तारामीरा आदि तिलहनी फसलों में गंधक के उपयोग से दानों में तेल की मात्रा में बढ़ोत्तरी होती है साथ ही दाने सुडौल एवं चमकीले बनते हैं जिसके कारण तिलहनी फसलों की पैदावार में 10-15 प्रतिशत बढ़ोत्तरी होती है।

दलहनी फसलों में जिप्सम

दलहनी फसलों में प्रोटीन प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। प्रोटीन के निर्माण के लिए गंधक अति आवश्यक पोषक तत्व है। इससे दलहनी फसलों में दोने सुडौल बनते हैं व पैदावार बढ़ती है। यह पौधों की जड़ों में स्थित राईजोबियम जीवांणु की क्रियाशीलता को बढाता है जिससे पौधे वातावरण में उपस्थित नत्रजन का अधिक से अधिक उपयोग कर सकते है।

गेहूँ में जिप्सम उपयोग

खाद्यान्न फसलों में जिप्सम के उपयोग से गंधक तत्व की आपूर्ति होती है। इससे पौधों की बढ़वार अच्छी होती है। गंधक से दाने मोटे एवं चमकदार बनते है। प्रोटीन की मात्रा में बढोत्तरी होती है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार प्रति हेक्. 250 किलोग्राम जिप्सम का उपयोग करने से गुणवत्तायुक्त उपज में बढोत्तरी होती है।

जिप्सम के अन्य फायदे

क्षारीय भूमि को सुधारने हेतु जिप्सम के अन्य फायदे

1. क्षारीय भूमि को सुधारने हेतु

जिस मृदा का पी.एच. मान 8.5 से अधिक तथाा विनियमशील सोडियम क मात्रा 15 प्रतिशत से अधिक होती, वह मृदा क्षारीयता की समस्या से ग्रसित होती है। इस प्रकार की मृदा सूखने पर सीमेन्ट की तरह कठोर हो जाती है एवं इसमें दरारें पड़ जाती है।
क्षारीय मिट्टी में पौधों के समस्त पोषक तत्वों की उपस्थिति के बावजूद मिट्टी से अच्छी उपज प्राप्त नहीं हाती है। ऐसी मिट्टी में सुधारने की आवश्यकता होती है, ताकि उसमें पैदावार ली जा सके। इस प्रकार की मिट्टी को भूमि सुधारक रसायन जिनमें जिप्सम प्रमुख है, डालकर सुधारा जा सकता है। जिप्सम के उपयोग से मिट्टी की भौतिक दशा में सुधार होत तथा इसके रासायनिक व जैविक गुणों में सुधार होता है। जिप्सम के उपयोग से मिट्टी में घुलनशील कैल्शियम की मात्रा बढ़ती है जो कि क्षारीय गुणों के लिये जिम्मेदार अधिशोषित सोडियम को घोल कर मिट्टी के कणों से हटा अपना स्थान बना लेते है। भूमि का पी.एच.मान कम कर देता है।

क्षारीय भूमि जिप्सम उपयोग करने पी.एच मानम में कमी के कारण भूमि में आवश्यक पोषक तत्वों की उपलब्धता बढ़ जाती है। भूमि सुधारने हेतु (ळत् टंसनम) जिप्सम की मात्रा मृदा परीक्षण रिपोर्ट के अनुसार काम में ली जाती है। साधारणः भूमि सुधार हेतु जिप्सम 3 से 5 मैट्रिक टन प्रति हेक्. की दर से काम में ली जाती है। भूमि सुधारक के रूप मंे जिप्सम का उपयोग करने के लिए निर्धारित मात्रा को मानसून की वर्षा से पहले खेत में बिखेत कर जुताई करके अच्छी तरह से 10-15 सेटी.मी. मिट्टी की ऊपरी सतह में मिला देना चाहिए ता खेत में डोलियां बनाकर बड़ी-बड़ी क्यारियां बना देनी चाहिए, ताकि वर्षा का पानी बहकर खेत में जा नहीं सके।
खेत में जिप्सम उपयोग के बाद में मानसून की एक या दो अच्छी वर्षा होने के बाद खेत में हरी खाद हेतु ढेंचा फसल की बवुाई कर देनी चाहिये। ढेंचा की बवुाई के 45-50 दिन बाद या फूल आने से पहले मिट्टी पलटने वाले हल या हैरो चलाकर ढेंचा को मिट्टी में 15-20 से.मी. की गहराई तक मिला देना चाहिए। इससे प्रति हेक्. 20 से 25 टन जीवांश का उत्पादन होना है। साथ ही मिट्टी की पी.एच. मान कम होने से मिट्टी की क्षारीयता में कमी होती है।

2. फसलों को पाले से बचाने में सहायक-

जिप्सम में गंधक पाया जाता है जिसके कारण जिन फसलों में जिप्सम का उपयोग किया जाता है उनमें पाले से नुकसान होने की संभावना कम रहती है।

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