कल्टीवेटर मशीन क्या है और इसके फायदे-कृषकों के लिए

कल्टीवेटर एक आयताकार बाक्स की तरह होता है तथा इसके फार एवं स्वीप दोनों दृढ़ होते हैं। इस कल्टीवेटर में फार से स्वीप बंधा रहता हैं। यह ट्रैक्टर चालित होता है तथा इसकी गहराई ट्रैक्टर के हाइड्रोलिक से नियंत्रित होती है। यह कल्टीवेटर काली मिट्टी यकपास के लिए ज्यादा उपयुक्त है। इस यंत्र से पशुचालित कल्टीवेटर की तुलना में 30 प्रतिशत मजदूर की बचत 35 प्रतिशत संचालन खर्च में बचत तथा 3.4 प्रतिशत उपज में वृद्धि होती है।
यह ट्रेक्टर चलित जुताई यत्रं है। इस यत्रं का उपयोग भूमि को तोड़ने खेतो की तैयारी या बुवाई में किया जाता है। टैªक्टर चलित 9 टाइन वाले कल्टीवेटर की कार्य क्षमता 0.45 हेक्. प्रति घंटा है।

कल्टीवेटर मशीन का रख रखाव-

आमतौर से सभी नट तथा बोल्टों को जांच करते रहना चाहिए जिससे हमेशा टाइट फिट रहें। सबसे बढ़िया तरीका यह है कि प्रतिदिन कार्य प्रारम्भ करने से पहले इनकी जांच कर लें।
फालों को घिस जाने पर पलट देना चाहिए या फिर नये फाल लगाने चाहिए।
प्रतिदिनि कार्य समाप्त करने के पश्चात तथा यन्त्र के उचित भण्डारण हेतु यन्त्र की पालिश की गयी सतहों पर ग्रीस लगाना चाहिएए जिससे कि यंत्र में जंग न लगने पाये।
आपरेटर को मशीन के विवरण के बारे में स्पष्ट जानकारी अवश्य होनी चाहिए जिससे वे टूटे हुये भागों या घिसे हुए भागों को पुनः कार्य प्रारम्भ करने से पहले ठीक कर लें।

सावधानियां-

बुवाई करते समय फालों के बीच की दूरी निश्चित होना चाहिए तथा फालों की गहराई भी बराबर होनी चाहिए।
खेत की तैयारी करते समय लाइनों के बीच की दूरी इतनी अधिक नही होनी चाहिए जिससे खेत बिना जुता हुआ रहे।
खाद उर्वरक डालते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि उर्बरक सूखा तथा भुरभुरा है या नहीं यदि भुरभुरा न हो तो उसे सुखा देना चाहिए। उर्बरक डालने के लिये यन्त्र मे लगने वाले भाग मे प्लास्टिक का प्रयोग करना चाहिए।
यन्त्र सेनिराई.गुड़ाई करते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि लाइनों में बोये हुए पौधे नष्ट न हों।

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