जैविक किसान की सफलता की कहानी-विनय कुमार (organic farmer)

किसान की सफलता की कहानी

मैं, विनय कुमार पुत्र श्री राम स्नेही ग्राम- भवानीपुर प्रताप, पोस्ट- गोधनी, जिला- कन्नौज का मूल निवासी हँू। मैंने सन् 2007 से जैविक खेती को अपनाया है। शुरूआत में मुझे जैविक खेती अपनाने में यह सोचकर शंका थी की रासायनिक खादों का उपयोग बन्द करने से फसलों की पैदावार घट जायेगी। लेकिन सरकार द्वारा चलाये जा रहें परियोजना के क्रियान्वयन संस्था द्वारा समय-समय पर किसान प्रशिक्षणों में शामिल हुआ तो मेरी सभी शंकायें दूर हो गयी।

मेरे खेतों में उगाई जा रही मुख्य फसलें आलू, सूरजमुखी, मक्का, एवं गेहूँ है। जैविक खेती अपनाने के प्रथम वर्ष की फसलों की पैदावार में 10-15 प्रतिशत की कमी आयी, लेकिन मेरे पूर्ण प्रयास एवं सरकार द्वारा चलाये जा रहे क्रियान्वयन संस्था के कर्मचारियों द्वारा समय-समय पर दिये गये सुझाव, प्रशिक्षण, फसल प्रदर्शन से मैने अपने खेत पर ही संसाधन जुटाना शुरू किया और खेती पर विशेष ध्यान देते हुये सस्ते एवं पर्यावरण अनुकूल संसाधन जैसे- नादेप कम्पोस्ट, वर्मी कम्पोस्ट, सी0पी0पी0 कम्पोस्ट (गाय के गोबर की कम्पोस्ट), बीजामृत, जीवामृत, तरल खाद एवं कीटनाशी आदि का सद्उपयोग किया। इन संसाधनों के साथ-साथ परियोजना के क्रियान्वयन संस्था द्वारा समय-समय पर दिये गये जैविक खेती के सावधानीपूर्वक अंगीकरण से न केवल फसलों की पैदावार ही बढ़ी बल्कि फसल उत्पाद की गुणवत्ता में बहुत ही सुधार आया। जैसे- आलू के न केवल आकार में बढ़ोत्तरी हुई बल्कि चमक भी बढ़ी और काले धब्बे भी नही आये जिससे बाजार में अच्छी कीमत प्राप्त हुई। आलू के भण्डारण क्षमता में भी काफी सुधार आया है। मक्का एवं गेहूँ के दाने भी काफी चमकदार एवं आकार में बढे़ है। जिनकी बाजार में तुरन्त अच्छे दामों बिक्री हुई।

अपने खेत पर उगाये गये जैविक अनाज एवं सब्जियों के उपयोग से न केवल मेरे परिवार का स्वास्थ्य सुधारा हैं बल्कि पशु भी स्वस्थ्य और खुश है। जैविक खेती को अपनाकर अपने खेत पर तैयार किये गये सस्ते संसाधनों के उपयोग से मेरी खेती उत्पादन लागत में 25-30 प्रतिशत तक की कमी आयी है।

खेतों में काम करते समय मैंने यह भी पाया है कि मेरे खेतों की मिट्टी भुरभुरी हो गयी है, और खेत में लम्बे समय तक नमी बनी रहती है। जिससे मुझे खेत में 1-2 सिंचाई भी कम करनी पड़ी है। मेरे पड़ोसी किसान जैविक खेती से बढ़ती खुशहाली को देखकर काफी आकर्षित है और जैविक खेती अपनाकर सरकार की परियोजना में शामिल होना चाहाते है।

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