एक किसान की जिंदगी को बदल दिया प्याज ने-इंद्रजीत

इंद्रजीत की जिंदगी को बदला प्याज की खेती ने

उत्तर प्रदेश के कुशीनगर को पांच साल पहले सबसे अधिक पिछड़े और कुपा​ेषित जिला घोषित कर दिया गया था। बीमारियां, गंदगी व टूटी सड़कों के अलावा इस जिले में किसानों की हलात बहुत ही बदत्तर थी।
किसानों की आत्महत्या के मामले में यह जिला आता था। यही नहीं यह क्षेत्र भुखमरी से भी प्रभावित रहा करता था।
अब इसी जिले से खेती से एक नया समाचार सामने आया है।

#दोगुनी हुई आय केंद्र सरकार व संस्थाओं की मदद से

#पूर्वांचल में किसान कर रहें हैं तरक्की

किसानों ने अब अपने खेती के तरीकों को बदलकर केंद्र सरकार द्वारा ​दी गई सुविधाओं, योजनाओं को अपना रहे हैं। जिससे किसनों की आर्थिक स्थिती भी बदल रही है।

कुशीनगर के गुसमा गांव के एक किसान ने मात्र 2.5 एकड़ कृषि भूमि में कृषी पर आधारित नए उपायों को अपनाकर अपनी योग्यता को कृषकों के सामने एक उदहारण पेश किया है।

इंद्रजीत ने अपनी सीमित भूमि तें गेहूं, सब्जी व अन्य फसलों को अलग—अलग बोया और उसमें मेहनत करके अपनी आर्थिक स्थिती को सुधारा है। जहां एक तरफ पूरे साल मेहनत करने के बाद किसानों के आमदनी केवल बीस से तीस हजार तक होती थी वहीं इंद्रजीत की आय प्रति एकड़ 63 हजार रूपये हो गई है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीन साल पहले किसानों की आय को 2022 में दुगना होने का वादा किया था तो वहीं इंद्रजीत भारत सरकार के नेशनल हार्टीकल्चर रिसर्च डेवलपमेंट फाउंडेशन के संपर्क में आकर वैज्ञानिक तरीके से खेती करने का हुनर सीखा।
इसके बाद उन्होंने अपने खेती की परंपरागत नीति को बदला और प्याज की खेती पर जोर दिया। प्याज की उन्नत प्रजातियों को सरकारी कृषी संस्थानों ने इंद्रजीत को मुहैया करवाया था।

पहले ही वर्ष में इंद्रजीत को अच्छा मुनाफा हो गया। इसके बाद उसने अन्य सब्जियों को भी इसी तरह से उगाकर बाजार की मांग को पूरा किया। यही नहीं प्याज की फसल के दाम साल के अक्टूबर से नंवबर के बीच बहुत तेज होते हैं। ऐसे में किसान को मुनाफा मिलना स्वभाविक ही है।

इंद्रजीत की तरह गांव के आस—पास के लोग अपनी खेती के तरीकों को बदलकर भारत सरकार के जरिए दी जाने वाली सुविधाओं को अपना रहे हैं। जो हमारे देश की कृषी के लिए एक अच्छा संदेश है।

 

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