अब बायो गैस बस चलेगी 1 रूपये प्रति किलोमिटर में—कृषि तकनीक

बायो-गैस बस सेवा पहली बार भारत में काफी किफायती और सस्ता (Bio gas bus in india)

भारत देश में पहली बार बायो- गैस बस सेवा चलने के लिये तैयार किया गया है। जो की मानव और जानवरों के मलत्याग से तैयार किया गया है। यह पहली बार कोलकत्ता शहर में चलने लिये तैयार है। यह यात्रियों के लिये कोलकता शहर के अंतरदंगा और गोरियां के बीच चलायी जायेगी । दोनों के बीच की दूरी 17.5 किलो मीटर है। जिसका किराया नाम मात्र 1 रूपये प्रति किलों मीटर होगा। बायोगैस की 12 बसें शहर के विभिन्न मार्गों पर चलती नजर आयेगी।

बायो-गैस जानवरों के गोबर और पौधों के सड़ने, गलने से उत्पन्न होने वाली मुख्य रूप से मीथेन गैस होती है। जो एक विषैली एवंं रंगहीन और ज्वलनशील गैस है। जिसका इस्तेमाल वाहनों के लिये ईधन एवं खाना पकाने और बिजली पैदा करने के लिये किया जाता है।
बायोगैस बस सेवा यूके में दो साल पहले ही शुरू कर दिया गया है।
इस बायोगैस बस में 1 कि.ग्रा. में 20 कि.मी. की यात्रा कर सकते है। जिसके लिए केवल 30 रूपया खर्च करना पड़ेगा। जो कि बेहद कम किराया है, टैंक 80 कि.ग्रा. क्षमता वाली यह गाड़ी 1 हजार 600 कि.मी. चलेगी।

 

बायोगैस बस का प्रयोग दिल्ली में भी किया जाएगा । ये बस 60 सीटर बिना एसी वाली होगी । वाहनों के लिये टाटा मोटर्स चेसिस का इस्तेमाल किया जा रहा है। भारत सरकार पर्यावरण-अनुकूल और सस्ते ईधन उपयोग को बढावा देना चाहती है क्योंकि इसमें कुछ क्षेत्रों में जीवाश्म ईधन विकल्प बनने की क्षमता है। बायोगैस सबसे सस्ती ईंधन है जो अंतरदंगा और गोरियां तक सबसे कम बस का किराया 12 रूपये लेकिन बायोगैस बस से केवल 1 रूपये में यात्रा कर सकते है। फीनिक्स के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर ज्योती प्रकाश दास ने कहां कि जैसें अन्य बसों गति होती है उसी प्रकार बायोगैस बस की गति सामान्य बस की तरह होगी।

 
डा0 दास वनस्पति विज्ञान में पी.एच.डी. कर चुके है और पिछले आठ वर्षों से बायोगैस पर काम कर रहे है।
फीनिक्स इंडियां रिसर्च एंड डेवलपमेंट ग्रुप एक वैकल्पिक उर्जा कम्पनी है। जिसे केन्द्रीय मंत्रालय ने बंगाल में बायोगैस वाहनों के प्रयोग तथा शुरू होने के लिये नई और अक्षय ऊर्जा के लिए चुना है।

 

 

केन्द्र ने प्रत्येक राज्य में इस ईंधन के उपयोग को लांच करने के लिए एक कंपनी का चयन किया है। पायलट इसको चलाने तथा सफल होने के बाद मंत्रालय बड़े पैमाने पर इस तकनीक की शुरूआत करेगा। मार्ग परमिट जारी करने के अलावा राज्य परिवहन विभाग के पास इस संबंध में अभी तक बहुत कुछ नहीं है। फीनिक्स ने बीरभूम जिले के डुबराझपुर में एक बायोगैस संयंत्र की स्थापना की है फिलहाल यह 1000 किलो गैस का उत्पादन कर सकता है । जो टैंकरों द्वारा कोलकता पहुंचेगा।

 

 

 

कम्पनी को 100 ईंधन पंप स्थापित करने की अनुमति मिल गई है। अगर वाणिज्यिक वाहन इस ईंधन पर चलता है तो इसे 15 साल बाद प्रतिबंध से छूट दी गई है। प्रत्येक बस पर फीनिक्स कम्पनी को 13 लाख रूपये का खर्च आयेगा। केन्द्रीय मंत्रालय की अधिसूचना में कहा गया है कि वाणिज्यिक वाहन जो 15 वर्ष से अधिक पुराने हैं और पहले से ही प्रतिबंधित हैं। अगर मालिक वाहन डीजल इंजन को जैव-ईंधनों पर स्विच करते हैं।
तो उनके वाहनों से प्रतिबंध हटा दिया जाएगा। इसका मतलब है हम सभी 12 नई बायोगैस बसें सड़कों पर चला सकते है।

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