जैविक कद्दू की खेती कर अच्छा मुनाफा लें!

कद्दू फसल यह भारत की एक लोकप्रिय सब्जी है जो बरसात के मौसम में उगाई जाती है। इसको हिन्दी में “हलवा या कद्दू के नाम से भी जाना जाता है और यह कुकुरिबिटिसिया परिवार से संबंधित है। भारत में कद्दू फसल का सबसे बड़ा उत्पादक है। इसका उपयोग सब्जियों में किया जाता है। इसमें विटामिन ए का अच्छा स्रोत है और इसमें पोटेशियम भी होता है। कद्दू सब्जी आंखों की दृष्टि को बढावा देने में मदद करता है। यह रक्तचाप को भी कम करता है इसमें भरपूर मात्रा में एंटीआंक्सीडेंट गुण होता है। इसकी पत्तियां और फल को औषधीय बनाने में प्रयोग करते है।

जैविक कद्दू की खेती – Organic Pumpkin cultivation tips in Hindi

सिंचाई -(Pumpkin Farming in Hindi)

इसकी सिंचाई उचित अंतराल पर करने की आवश्यकता होता है। बीज बोने के बाद तत्काल सिंचाई की भी आवश्यकता होती है। इसे मौसम के आधार पर 6-7 दिनों के अंतराल पर सिंचाई की आवश्यकता होती है। कुल मिलाकर 8-10 सिंचाई की आवश्यकता होती है।

किस्में –

सोलन बादमी -प्रबल बेल , फल संतरी रंग का 24 गुणा 17.5 से.मी. आकार का, वनज 2 से 4 कि.ग्रा. गोलाकार उभार वाला, गूदा सघन और पीला, हरी डण्डी वाला, अगेती उपज 425-500 कि्. प्रति हेक्.

बुवाई का समय –

फरवरी -मार्च तथा जून-जुलाई

बीज की मात्रा –

4 कि.ग्रा. प्रति हेक्.
अन्तर – 250 -300 से.मी. की दूरी पर 3 या 4 बीज प्रति स्थान, बाद में विरलन करने पर 1 या 2 पौधे
अन्तर – 30 गुणा 10 से.मी.

खाद एवं उर्वरक –

शलगम की अच्छी पैदावार के लिये 80 किलोग्राम, नाइट्ररेजन, 60 कि.ग्रा. फॉस्फोरस तथा पोटाश 40 कि.ग्रा की आवश्यकता पड़ती है। उपरोक्त तत्वों के पूर्ति के लिये 80-100 कुन्तल नादेप कम्पोस्ट खाद अथवा 150-200 कुन्तल सड़ी गोबर की खाद के साथ 2 कि.ग्रा. प्रति हेक्. की दर से जैव उर्वरक को अन्तिम जुताई के समय खेत में मिला देना चाहिए। निराई-गुड़ाई व मिट्टी चढ़ाने (बुवाई को 30-35 दिन बाद) समय 2 कि.ग्रा. जैव उर्वरक, एवं 2 किग्रा. गुड़ को 150-200 कि.ग्रा. अच्छी सड़ी कम्पोस्ट खाद के साथ छाया में सात से दस दिन तक सड़ाकर कर सिंचाई के समय खेत में बुरक दें। सूक्ष्म तत्वों की पूर्ति के लिये सिंचाई के पानी के साथ 3 बार जीवामृत का उपयोग करें।

बीजोत्पादन –

करेला, खीरा और कद्दू पर परागण वाले फसलें है। एक ही प्रजाति की दो किस्में एक दूसरे से 400 मी. की दूरी पर लगायें ताकि बीज की शुद्धता बनी रहें। बीजोत्पादन के लिये इन सब्जियों को सामान्य विधि से ही लगायें। कद्दू के बीज पके हुए फल को काट कर निकाले जाते हैं तथा छाया में सुखा लिये जाते है।
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