बाजरा नेपियर चारा की खेती कैसे करे जिससे पशु चारा की समस्या खत्म हो सकें

दुधारू पशुओं के लिए हरा चारा सबसे उपयुक्त माना जाता है। लेकिन किसान बरसात के सीजन में ही मवेशियों को उपलब्ध करा पाते हैं। गर्मियों के सीजन में खेतों में चारा ढूंढ़ने से भी नहीं मिलता है। बाजरा नेपियर घास गर्मियों के मौसम में भी हरी रहती है और हाईब्रिड की होने के कारण इसके खाने से दुधारू पशु 10 से 15 प्रतिशत अधिक दूध देने लगते है। नेपियर और हाथी घास की खेती चारा फसल के तौर पर की जाती है। नेपियर-बाजरा बाजरा और हाथी घास के बीच संकरण है। यह हाइब्रिड पौधों की पैदावार में वृद्धि करता है। इस रोपाई के बाद यह लगातार 2-3 वर्ष उपज दे सकता है।

मिट्टी-

इसे विभिन्न तरह की मिट्टी में उगाया जा सकता है। यह भारी मिट्टी जिसमें पोषक तत्व उच्च मात्रा में हो उगाने पर अच्छे परिणाम देती है। यह खारेपन को भी सहनेयोग्य है।
किस्में – पीएनबी 233 हाइब्रिड मुलायम और चैड़ी और लम्बे पत्तों वाली किस्म है। इसकी औसतन पैदावार 1100 क्विंटल प्रति एकड़ होती है। पीएनबी 233 -83 यह जल्दी विकास करने वाली किस्म है और इस हाइब्रिड को फूल देरी से लगते है।

जमीन की तैयारी-

मिट्टी को भुरभुरा करने के लिए हल से जोताई करें और दो बार हैरो फेरें। जोताई के बाद तवियों से मिट्टी को समतल करें।
बिजाई- बिजाई का समय सिंचित स्थितियों में फरवरी से मई के आखिरी हफ्ते में रोपाई करें बारानी क्षेत्रों में जून से अगस्त में बिजाई की जाती है।
बीज की गहराई- तने के भाग को 7-8 से.मी की गहरी खालियों में बोयें।

बिजाई का ढंग-

इसकी बिजाई तने और जड़ के भागों को सीधे बो कर की जाती है।
बीज- बीज की मात्रा- नेपियर बाजरा के बीज बहुत छोटे होते हैं व्यापारक खेती के लिए इसका प्रजनन तने के भाग दो या तीन गांठे और जड़ के भाग 30 से.मी लंबे द्वारा किया जाता है।

खेत की तैयारी के समय गाय का गला हुए गोबर 20 टन प्रति एकड़ में डालें। बिजाई के 15-20 दिन बाद नाइट्रोजन 30 किलो यूरिया 70 किलो प्रति एकड़ में डालें। प्रत्येक कटाई के बाद फिर से नाइट्रोजन की खुराक डालें फास्फोरस 40 किलो सुपर फासफेट 240 किलो दो बराबर हिस्सों में डालें पहली खुराक बसंत ऋतु और दूसरी मानसून के मौसम में डालें।

खरपतवार नियंत्रण-

रोकथाम के लिएए फलियों वाली फसलों से अंतर फसली लगाएं। अंतरफसली से मिट्टी में पोषक तत्व बने रहते है जिससे चारे में भी पोषक तत्व आते हैं जो कि पशुओं के लिए अच्छे होते हैं।

सिंचाई-

गर्म और शुष्क ऋतु में मौसम और मिट्टी के अनुसार सिंचाई करें।

फसल की कटाई-

बिजाई के 50 दिनों के बाद कटाई की जाती है। पहली कटाई के बाद दूसरी कटाई फसल के 1 मीटर ऊंची हो जाने पर करें। फसल को 2 मीटर से ज्यादा ऊंचा ना होने दें।

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