मेथी की खेती कैसे करें जैविक तरीके से

इस लेख में हम आपको बताएंगे कैसे मेथी की जैविक खेती कर आप अच्छा मुनाफा कमा सकते हो। प्रिय किसान भाईयों मेथी का प्रचलन शहरों में दिन प्रति दिन बढ़ता जा रहा है। क्योंकि आयुर्वेद में मेथी को कई बीमारियों का उपचार बताया गया है। तो इस वजह से अब शहरों में दिनों दिन मेथी की मांग बढ़ती जा रही है। यदि आप भी जैविक तरीके से मेथी का उत्पादन करना चाहते हैं तो जरूर इस लेख को पढ़ें।

मेथी की जैविक खेती कैसे करें – methi organic cultivation in Hindi

बुआई का समय अगस्त-नवम्बर

बीज की मात्रा आई सी-74: 20 कि.ग्रा./हेक्. कसूरी: 15 कि.ग्रा./हैक्टेयर
अन्तर 25-30×7.5 सें.मी.

खाद एवं उर्वरक-

पालक की भांति ही खाद डालें तथा पौधें का संरक्षण करें ।

किस्में-

आई सी-74- अधिक उपज देने वाली स्थानीय किस्म, नर्म पत्ते, अच्छी सुगन्ध, उर्वरा भूमि पर अच्छी बढ़वार, औसत उपज 75-100 क्ंिवटल प्रति हेक्.

कसूरी-

अच्छी उपज देने वाली किस्म, नर्म पत्तों की तीन कटाईयां मिल जाती हैं, 155 दिन मंे तैयार होने वाली किस्म, बहुत सुगन्ध वाली, स्वादिष्ट किस्म, हरी फसल को छाया में सुखाकर प्रयोग में लाया जाता है, औसत उपज 60-75 क्ंिवटल प्रति हेक्.।

पालम सौम्या-

दोहरे प्रयोग वाली ;सब्जी तथा मसाला के लिएद्ध, अत्याधिक उपज प्रदान करने वाली, ताजा पत्तों के लिए 55-60 दिन में तथा बीज फसल 175-180 दिन में तैयार, ताजा पत्तों की पैदावार 70-75 क्ंिवटल प्रति हैक्टेयर तथा बीज फसल की पैदावार 15-22 क्ंिवटल प्रति हेक्. ।

पूसा कसूरी-

फैलावदार पौधे, गुच्छेदार पत्ते, विशेष सुगन्धयुक्त, 2-3 ताजा पत्तों की कटाई प्रदान करने वाली किस्म, औसत ताजा पत्तों की उपज 90-100 क्ंिवटल प्रति हैक्टेयर तथा बीज फसल की पैदावार 5-6 क्ंिवटल प्रति हैक्टेयर ।

बीजोत्पादन- Cultivation of Fenugreek organic farming in Hindi

बीजोत्पादन के लिए फसल हरी फसल की तरह ही उगाई जा सकती है परन्तु पत्तो की एक कटाई के बाद बीज बनने के लिए छोड़ दी जाती है । पृथकीकरण के लिए 25-50 मीटर का अन्तर रखें । अन्य किस्मों के पौधे तथा रोगी पौधें को उखाड़ दें । फलियां पकने पर फसल की कटाई की जाती है । इन्हें ध्ूाप में सुखाकर गहाई करें । बीज को साफ करके बन्द बर्तन में भण्डारण करें ।
बीज प्राप्ति: 600-800 कि.ग्रा. प्रति हेक्.

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