मकचरी की खेती करे जिससे पशुओं के चारे का समस्या हल हो सके

मकचरी चारे वाली फसल पशुओं के लिये बहुत ही स्वादिष्ट और उपयोगी होता है। इसे पशु बहुत ही चाव से खाते है तथा इस चारे में किसी प्रकार की बीमारी, कीड़ा नहीं लगता है तथा इसे सिंचिंत तथा अर्द्ध-पहाड़ी वाले इलाके में आसानी से उगाया जा सकता है। वानस्पातिक नाम यूकैलिआना मैक्सीकाना है। यह रसीले चारे की फसल है। जिसका औसतन कद 6-10 फीट होता है। इसके पत्ते लम्बे और चैड़े होते हैं। पौधे की चारों तरफ बहुत लम्बी शाखाएं होती है। मादा पौधे जब पूरी तरह तैयार हो जाते हैं और फूल और शाखाएं निकल आती हैं। तो उसे मुख्य भाग को बलियां कहा जाता है। इसकी खेती ज्यादातर पंजाब राज्य में की जाती है। यह मुख्य तौर पर नवंबर के महीने में चारा पैदा करने वाली फसल है और लम्बे समय तक हरी रहती है।

मिट्टी– रेतीली मिट्टी भारी दोमट मिट्टी में उगाई जा सकती है। यह भारी मिट्टियों में बढ़िया पैदावार देती है। हल्की रेतली जमीनों में इसकी खेती ना करें क्योंकि यह फसल के विकास पर बुरा प्रभाव डालती है। बढ़िया विकास के लिए मिट्टी का पी.एच 5-8 तथा 7-0 होना चाहिए।

किस्में और पैदावार-

उन्नत मकचरी, सिरसा ईम्प्रूवड या टी.एल-1

जमीन की तैयारी-

मकचरी की बिजाई के लिए जमीन को अच्छी तरह से तैयार करें। जमीन को बढ़िया तरीके से समतल करने के लिए एक बार हैरो से जुताई करें और फिर दो बार सुहागा फेरें फसल की बिजाई तैयार किये बैडों पर की जाती है।

बिजाई का समय-

25 जून महीने में नर्सरी तैयार करें और जून-जुलाई महीने में बीजों की बिजाई करें अगस्त में बिजाई ना करें क्योंकि इससे पैदावार कम हो जाती है।

फासला-

पौधे के विकास अनुसार बीजों को 30 गुणा 40 से.मी के फासले पर बोयें
बीज की गहराई-बीज को 3-4 से.मी गहराई पर बोयें
बिजाई का ढंग- बिजाई केरा विधि या बिजाई वाली मशीन की सहायता से करें।
बीज की मात्रा- बढ़िया अंकुरण वाली किस्मों के लिए 16 किलो प्रति एकड़ बीजों का प्रयोग करें।

खाद-

खेत की तैयारी समय की खाद 8 टन प्रति एकड़ डाले नाइट्रोजन 20 कि.लो ग्रा. यूरिया 44 कि.ग्रा. की मात्रा का प्रति एकड़ में प्रयोग करें बिजाई से एक महीने बाद नाइट्रोजन 20 कि.लो. यूरिया 44 कि.लो.का छींटा दें।

खरपतवार नियंत्रण-

नदीनों की प्रभावशाली रोकथाम के लिए बार-बार गुड़ाई करते रहें अगर नदीनों पर काबू ना पाया जाए तो पैदावार में बहुत कमी आती है। प्रभावशाली रोकथाम के लिए ऐट्राटाफ 50 डब्लयू पी 400 ग्राम प्रति एकड़ को 200 लीटर पानी में मिलाकर बिजाई से 2-3 बाद स्प्रे करें। मिट्टी का तापमान और नदीनों को कम करने के लिए मलचिंग का तरीका भी प्रभावशाली सिद्ध हो सकता है।
सिंचाई- 1-3 बार वर्षानुसार करें।

कीट और रोकथाम-

मक्की का छेदक यह कीट मुख्य तौर पर फसल के शुरुआती विकास के समय हमला करता है।
इसकी रोकथाम के लिए सेविन 50 डब्लयू पी यकार्बरील 100-150 ग्राम प्रति एकड़ की स्प्रे करें।

फसल की कटाई-

कटाई आमतौर पर बिजाई से 110-120 दिन बाद की जाती है। फसल के गुच्छे निकलने पर कटाई की जाती है। इस समय चारा ज्यादा देर तक हरा रहता है और पौष्टिक तत्वों से भरा होता है। सूखी फसल की कटाई धूप में कर ली जाती है तथा चारे को सितम्बर या अक्टूबर में प्राप्त कर सकते है।

कटाई के बाद-

फसल को हाथों से दबाया जाता है तथा फसल के ऊपर से ट्रैक्टर को चलाया जाता है स्टोर करने से पहले सफेद दानों को अलग कर ले इसके बाद चारे को बोरियों या किसी बंद जगह पर भण्डारण कर लें।

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