लोबिया की खेती चारे और खाने लिये करें जिससे हो स्वास्थ लाभ

लोबिया खाने से लाभ- लोबिया को इसे बींस के नाम से भी जाना जाता है। यह खाने में बड़ी ही स्वाद लगती है। लोबिया में ऐसे सभी जरूरी पोषक तत्व मौजूद होते है जो शरीर की कई आवश्यकताओं को पूरा करते हैं। इसमें प्रोटीन, फाइबर और आयरन की मात्रा काफी अधिक होती हैं जो शरीर की बहुत- सी बीमारियों को दूर रखता हैं।

लोबिया की खेती – cowpea cultivation in Hindi

पाचन शक्ति को दुरूस्त रखें- इसमें फाइबर और प्रोटीन भरपूर मात्रा में पाया जाता है जो पेट संबंधित कई बीमारियों को दूर रखते हैं।

संक्रमण- इसमें विटामिन ए और एंटीऑक्सीडेंट मौजूद होते हैं जो आपके शरीर को स्वस्थ बनाएं रखते है।

डायबिटीज- लोबिया एक दवाई की तरह काम करती है। यह खून में ग्लूकोज की मात्रा को नियंत्रित रखती है और शुगर लेवल को भी बढ़ने नही देती।

वजन करें कम – वजन कम करने में लोबिया बड़ी कारगार है। इसका सेवन रोज सालाद के रूप में करें। इसका सेवन करने से पेट ज्यादा समय तक भरा रहता है जिससे कि आप अपने वजन को कंट्रोल में कर सकते हैं।

हृदय समस्याओं को दूर करें-लोबिया में पोटेशियम और मैग्नीशियम पाया जाता है जो हृदय संबंधित बीमारियों को दूर करने में मददगार होते हैं। यह खून में कॉलेस्ट्रॉल के स्तर को भी सही बनाएं रखता है।

भूमि की तैयारी-

दोमट मिट्टी उपयुक्त होती है। खेत समतल तथा उचित जल निकास वाला होना चाहिए एक जुताई मिट्टी पलटने वाले हल या देशी हल अथवा कल्टीवेटर से करनी चाहिए।
बुवाई का समय एवं बीज दर -लोबिया की बुवाई वर्षा प्रारम्भ होने पर जुलाई में करें।

मुख्य प्रजातियां बीज दर एवं उपज-

cowpea in hindi

बीजोपचार-

बुवाई के पूर्व बीज को 2 ग्राम थीरम से प्रति किग्रा० की दर से शोधित करने के बाद लोबिया को विशिष्ट राइजोबियम कल्चर से उपचारित करके बोना चाहिए।
्बुवाई- दाना व हरी फलियों के लिए बुवाई पंक्तियों में करनी चाहिए। दाने वाली प्रजाति लोबिया टा-2 की बुवाई पंक्तियों में 45-50 सेमी० बुवाई फलियों के दूरी पर करनी चाहिए।

खाद- नत्रजन 10-15 किग्रा० तथा फास्फोरस 20-25 किग्रा० प्रति हेक्टर की दर से बुवाई के पहले प्रयोग करना चाहिए।
सिंचाई- सूखे की अवस्था में एक, दो सिंचाई अवश्य करें।
निराई-गुड़ाई- बुवाई के 22-25 दिन बाद एक निकाई यदि खरपतवार हो तो करनी चाहिए।
फसल सुरक्षा- माहू कीट-यह कीट झुण्डों मैं पोधो पर चिपका रहता है था पत्तियों एवं फूलों एवं फलियों से रस चूसकर फसल को हानि पहुँचता है।
उपचार-इसकी रोकथाम हेतु निम्न रसायन का छिड़काव करना चाहिए।
1 डाइमिथोएट 30 ई०सी० 1 लीटर प्रति हेक्टर
फली बेधक- इनकी सूंड़ियां फली के अन्दर दाने को खाकर नुकसान पहुंचाती हैं।
उपचार- इनकी रोकथाम हेतु निम्न रसायन का प्रयोग फसल में फूल आने पर करना चाहिए
1 मोनोक्रोटोफास 36 ई०सी० 600 मि० लीटर प्रति हेक्टर की दर से करें।

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