लोबिया की खेती पशुचारे के लिये कैसे करें

लोबिया की खेती चारे व दाने के लिए की जाती है। प्रदेश के भारत के विभिन्न जनपदों में लोकप्रिय है। लोबिया को कई नामों से जाना जाता है। जैसे काली आंख वाली मटर आदि। यह अंडाकार बीन्स की तरह दिखती है। यह सफेद, भूरे और काले रंगों में होता है। और इसमें कई प्रकार के खनिज तत्व और पोषक तत्व पाए जाते हैं। यह इंसान की सेहत के लिए बहुत अच्छा माना गया है।

लोबिया की खेती पशुचारे के लिये कैसे करें – lobia ke kheti kaise kare

भूमि की तैयारी –

इसके लिये दोमट भूमि उपयुक्त होती है। खेत समतल तथा उचित जल निकास वाला होना चाहिए एक जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से करके दो जुताइंया देशी हल अथवा कल्टीवेटर से करनी चाहिए।

बुवाई का समय एवं बीज दर –

लोबिया की बुवाई वर्षा प्रारम्भ होने पर जुन या जुलाई में करें।
मुख्य प्रजातियां बीज -यू.पी.सी.-4200, 70-80, 350- रसियन जाइंट, आइ.जी.एफ.450,
यू.पी.सी. 5287

बीजोपचार-

बुवाई के पूर्व बीज को 2 ग्राम थीरम से प्रति किग्रा० की दर से शोधित करने के बाद लोबिया को विशिष्ट राइजोबियम कल्चर से उपचारित करके बोना चाहिए।

बुवाई –

दाना व हरी फलियों के लिए बुवाई पंक्तियों में करनी चाहिए। दाने वाली प्रजाति लोबिया टा-2 की बुवाई पंक्तियों में 45-50 सेमी० तथा 5269 लोबिया की प्रजाति की बुवाई फलियों के लिए 50 सेमी० की दूरी पर करनी चाहिए।

खाद –

नत्रजन 10-15 किग्रा०, फास्फोरस 20 किग्रा० प्रति हेक्टर की दर से बुवाई के पहले प्रयोग करना चाहिए।
सिंचाई – सूखे की अवस्था में एक या दो सिंचाई अवश्य करें।
निकाई -.गुड़ाई – बुवाई के 20-25 दिन बाद एक निकाई यदि खरपतवार होए तो करनी चाहिए।
फसल सुरक्षा- माहू कीट – यह कीट झुण्डों मैं पौधो पर चिपका रहता है था पत्तियों फूलों एवं फलियों से रस चूसकर फसल को हानि पहुँचता है।
उपचार – इसकी रोकथाम हेतु निम्न रसायन का छिड़काव करना चाहिए।
डाइमिथोएट 30 ई०सी० 1 लीटर प्रति हेक्टर।

फली बेधक –

इनकी सूंड़ियां फली के अन्दर दाने को खाकर नुकसान पहुंचाती हैं।

उपचार-

इनकी रोकथाम हेतु निम्न रसायन का प्रयोग फसल में फूल आने पर करना चाहिए
मोनोक्रोटोफास 36 ई०सी० 600 मि० लीटर प्रति हेक्टर।

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