जैविक दूध उत्पादन की मुख्य सावधानियां क्या हैं-दूध उत्पादन व्यवसाय

पशुधन संख्या एवं दुग्ध उत्पादन के हिसाब से भारत दुनिया का सबसे पहला देश है। दुनिया की कुल पशुओं की संख्या का 16 प्रतिशत हिस्सा भारत में है। चिंता का विषय यह है कि दुग्ध उत्पादन की दृष्टि से भारत काफी देशों से पिछड़ा हुआ है, इसलिए देश में गुणवत्तायुक्त पशुओं की संख्या बढ़ाने की आवश्यकता है, जिससे देश में दुग्ध उत्पादन के साथ-साथ गोबर व मूत्र से तैयार विभिन्न उत्पादों में भी बढ़ोत्तरी होगी और किसानों के लिए पशु एक अच्छी आय का स्रोत बन जायेंगे। जैविक दूध उत्पादन प्राप्त करने के लिए दुधारू पशुओं का स्वस्थ होना निहायत जरूरी है। इसके लिए आवश्यक है कि पशुओं को प्रतिदिन जैविक आहार जैसे – भूसा, हराचारा, खली, दाना, चोकर, बिनौला, साफ पानी आदि की व्यवस्था समय से पूर्व ही सुनिश्चित कर लेनी चाहिए। जैविक खेती एवं जैविक दुग्ध उत्पादन दोनों ही एक दूसरे के पूरक हैं। जैविक दुग्ध उत्पादन लेने के लिए किसानों को निम्नलिखित बिन्दुओं को ध्यान में रखना होगा।

जैविक दूध उत्पादन में किसान निम्नलिखित सावधानियां करें

 

  • दुधारू पशुओं को बांधने एवं दूध दोहन का स्थान साफ-सुथरा होना चाहिए।
  • पशुओं के बांधने एवं दूध दोहन वाले स्थान के आसपास कभी भी कृत्रिम रसायनों का प्रयोग न करें।
  • जैविक प्रक्षेत्र से ही प्राप्त आहार (भूसा,हराचारा,दाना,खली,चोकर) पशुओं को खिलाएं।
  • दुधारू पशुओं को हरसंभव प्रति दिन जैविक हराचारा,दाना,खली चोकर “जैविक मिनरल मिक्चर” आदि समय से खिलाएं।
  • पशुओं के बीमार होने की अवस्था में पशु चिकित्सक की सलाह के उपरांत आर्युवैदिक दवाओं का प्रयोग करें।
  • दुधारू पशु एवं बच्चों को गर्मी एवं बरसात के दिनों में दो बार एवं सर्दी के मौसम में एक बार अवश्य नहलाएं।
  • दुधारू गाय को प्रतिदिन खरेरा कर सफाई करें व गर्मियों में समय पर नहलाएं।
  • दुधारू पशु से दूध उतारने के लिए किसी भी प्रकार के इन्जेक्शन अथवा दवा का प्रयोग न करें।
  • दूध दोहन के समय बाल्टी, हाथ, गाय-भैंस के थनों को स्वच्छ पानी से धोएं।

यदि पशु का दूध अचानक कम हो जाए तो क्या करें:

पशुपालन विभाग द्वारा संस्तुत दवा-सतावरी 100 ग्राम, चन्द्रशूल (आल्या) 100 ग्राम तथा बिलारीकन्द 100 ग्राम इन तीनों को बराबर मात्रा में देकर सुबह-शाम 150-150 ग्राम खिलाएं। इससे दूध में निश्चित बढ़ोत्तरी होगी।
दूध दोहन के समय बीड़ी, तम्बाकू आदि का सेवन न करें।
पशुओं से मानवता का व्यवहार करें।

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