जैविक प्याज की बुवाई कैसे करें

किस्में

नासिक लाल कंद ;गांठद्धलाल रंग के, अधिक देर तक रहने योग्य, औसत उपज 200 से 250 कि्ंवटल प्रति हैक्टेयर
एन-53 खरीफ फसल के रूप में उगाने के लिए उपयुक्त, कन्द लाल रंग के व मध्यम आकार के, औसत उपज 150 से 180 कि्ंवटल प्रति हैक्टेयर
एग्रीफाउण्ड डार्क रैड इसकी गांठें गोल, गहरी लाल तथा व्यास 5.8 सैं.मी., 100 से 110 दिन में तैयार होने वाली किस्म, औसत उपज 200-250 कि्ंवटल प्रति हैक्टेयर
पटना रैड गाँठें गोल मध्यम आकार की, हल्के भूरे रंग तथा अच्छी टिकाऊ क्षमता वाला, रोपाई के बाद 135-140 दिनों में तैयार, औसत पैदावार 200-250 कि्ंवटल प्रति हैक्टेयर
ब्राऊॅन स्पैनिश गाँठें गोल व अण्डाकार, लाल भूरा रंग तथा छाल मोटी, अच्छी टिकाऊ क्षमता वाली
पालम लोहित गाँठें लाल-बैंगनी रंग की, गोलाकार, चमकीली, छिलका तथा गर्दन कसी हुई, औसतन उपज 450-500 कि्ंवटल प्रति हैक्टेयर, अच्छी टिकाऊ क्षमता वाली किस्म ।

बुआई का समय जून-जुलाई ;खरीफ फसलद्ध, अक्तूबर-नवम्बर-दिसम्बर;मुख्य फसल: onion cultivation in hindi

बीज की मात्रा 8-10 कि.ग्रा. प्रति हैक्टेयर

अन्तर 15ग10 सैं.मी.

खाद एवं उर्वरक – जैविक प्याज की बुवाई कैसे करें-jaivik pyaj ki buwai kaise kare in Hindi

प्याज की अच्छी पैदावार के लिये 100 किलोग्राम, नाइट्रोजन, 60 किग्रा.फॉस्फोरस तथापोटाश40 किग्रा.की आवश्यकता पड़ती है। उपरोक्त तत्वों की पूर्ति के लिए 100-150 कुन्तल नादेप कम्पोस्ट खाद अथवा 250-300 कुन्तल सडी गोबर की खाद के साथ 2 किग्रा. प्र्रति हेक्टेयर की दर से जैव उर्वरक को अन्तिम जुताई के समय खेत में मिला देना चाहिए। निराई-गुड़ाई व मिट्टी चढ़ाने (बुवाई के 30-35 दिन बाद) समय 2 किग्रा. जैव उर्वरक, एवं 2 किग्रा. गुड़ को 150-200 किग्रा. अच्छी सड़ी कम्पोस्ट खाद के साथ छाया में सात से दस दिन तक सड़ाकर कर सिंचाई के समय खेत में बुरक दें। सूक्ष्म तत्वों की पूर्ति के लिए सिंचाई के पानी के साथ 3 बार जीवामृत काउपयोग करें।

बीजोत्पादन

प्याज का बीजोत्पादन विशिष्ट कार्य है । बीज वाले खेतों में सामान्य फसल की तुलना में अधिक मात्रा में बीज बोये जाते हैं ताकि प्याज छोटे रहें क्योंकि छोटी गांठों में अधिक देर तक सुरक्षित रहने की क्षमता होती है । प्याज की मातृ-कन्द सितम्बर और अक्तूबर में लगाई जाती है । बीज उत्पादन के लिए गांठे 45ग45 सैं.मी. की दूरी पर लगायें । गांठे जो हरी ही होती है उन्हें जमीन से उस समय निकालें जब डण्ठल गिरने शुरू हो जायें । इन्हें पास-पास लगाने से अधिक बीज प्राप्त होता है । सारे बीज-छत्र एक साथ नहीं पकते । इन्हें 2-3 बार थोड़े-थोड़े समय के अन्तर पर एकत्रित किया जाता है । बीज छत्र 4 से 5 सैं.मी. लम्बी डण्डी के साथ काटे जाते हैं । जब ये पूरी तरह सूख जायें तभी उसकी गहाई की जाती है । इस समय ध्यान रहे कि बीज को कोई हानि न पहुँचे । इसे साफ करके सुखाकर बन्द डिब्बों में ही रखें । प्रमाणित बीज और आधार बीज प्राप्त करने हेतु अन्य किस्मों को क्रमशः 800 मीटर व 1000 मीटर की दूरी पर रखें । शेष शस्य कार्य मुख्य फसल की भांति ही है ।

बीज प्राप्ति 8-10 कि.ग्रा. प्रति हैक्टेयर ;65-80 ग्रा. प्रति बीघाद्ध

पौध संरक्षण

रोग

लक्षण

उपचार

1. कमरतोड़ रोग : पौध अंकुरण से पहले तथा बाद में मर जाती है । प्रभावित पौध्े जमीन पर गिर जाते हैं । टमाटर की तरह ।
2. जामनी धब्बा रोग : फूल वाली डण्डियों पर जामनी रंग के धब्बे पड़ जाते हैं और वहां से ये डण्डियां टूट कर गिर जाती हैं । बुआई से पहले कन्दों को ट्राईकोडर्मा;300 ग्राम/100 लीटर पानीद्ध में डुबोयें । रोग के प्रकोप के साथ ही उपरोक्त घोल का हर 15 दिन के अन्तर पर छिड़काव करते रहें ।
3. स्टेमफाईलम लीफ स्पाट : जामनी हरे रंग के लम्बे चकते पत्तों व तनों पर पड़ जाते हैं । रोग के प्रकट होते ही ट्राईकोडर्मा;300 ग्राम/100 लीटर पानीद्ध का छिड़काव करें । यदि आवश्यक हो तो पुनः 15-20 दिन बाद फिर छिड़काव करें ।
4. डाऊनी मिल्डयू : प्रभावित भागों पर चकते पड़ जाते हैं । उपचार विधि वही है जो जामनी धब्बा रोग में दी गई है ।

कीट

1. थ्रिप्स : फरवरी से मई तक यह प्याज की फसल को बहुत हानि पहुँचाते हैं जिसके कारण पत्तां पर सफेद धब्बे पड़ते हैं और बाद में ये पत्ते सूख जाते हैं । आक्रमण दिखाई देते ही तरल खाद एवं कीटनाशी जो गोबर, गौ-मूत्र तथा विभिन्न प्रकार के औषधीय पौधों एवं वृक्षों की पत्तियों से बनाये जाते हैं की 10 लीटर मात्रा को 100 लीटर पानी में घोल बनाकरछिड़काव करें तथा 15 दिन के बाद पुनः छिड़काव करें।

 

Loading...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *