दीमक नियंत्रण प्रबन्धन कैसे कर सकते आप जाने

परंपरा और विज्ञान का संयोजन, दीमक वर्ग इंसेक्टा (प्देमबजं) और गण आइसाॅप्टरा (प्ेवचजमतं) की सदस्य हैं। ये बस्तियाँ बनाकर समूहों में रहती हैं और इनकी बस्तियों में सामाजिक संगठन की पूर्ण व्यवस्था रहती है। बस्तियों का कार्य संपन्न करने के लिए इनके समूहों में श्रमिक, सिपाही तथा सेविका दीमकें होती हैं। यह विश्वास करने योग्य बात नहीं परन्तु वास्तविकता यह है कि अपने आवश्यकतानुसार यह प्राणी श्रमिक अथवा सिपाही दीमक पैदा करता रहता है। यहां तक कि यदि रानी की प्रजनन शक्ति समाप्त हो जाय या वह मर जाय तो श्रमिक किसी भी बच्चे को विशेष भोजन खिलाकर रानी बना देते हैं।
दीमक की पहचान
देखने में दीमक चींटी की तरह होती है, परन्तु वैज्ञानिक वर्गीकरण के अनुसार उससे भिन्न और उसकी अपेक्षा कम विकसित है। अनुमान है कि यह प्राणी पिछले 20 से लेकर 30 लाख वर्ष से पृथ्वी पर है, दीमकें केवल गरम व शीतोष्ण वाले स्थानों पर ही पायी जाती है। अबतक लगभग इनकी 1500 जातियों का अध्ययन हुआ है। यह अपने घर प्रमुख स्थानों पर बनाती है इनके घरों को टरमिटेरिया या वल्मीक कहते है। प्रत्येक बस्ती में एक शाही जोड़ा होता है एक रानी तथा एक राजा। ये पंखदार होते हैं और बस्ती के निर्माता होते हैं। वंध्या श्रेणी की दीमकों में कुछ कामकाज करने वाली श्रमिक दीमकें और कुछ बस्ती की रक्षा करने वाले सिपाही। श्रमिक वास्तव में मादा होते हैं जिनकी प्रजनन शक्ति लुप्त हो जाती है तो कुछ भोजन एकत्रित करते है तो कुछ रानी की देखभाल करते है। अपने काम के अनुसार इन्हें कई श्रेणियों में बांटा जाता है। इसी प्रकार सिपाही भी दो प्रकार के होते है: बडे़ जबडे़ वाले, सूंड वाले, जिनका सर सूंडदार होता है और जो शत्रु पर नाशक द्रव्य की पिचकारी चलाते हैं।
दीमक के मुखांग लकड़ी तथा वनस्पति आदि काटने के लिए बने रहते हैं। ये भोजन को कुतरकर खाती है इसलिए चिबुकास्थि इनमें दृढ होती और उनकी भीतरी सतह पर छोटे दांत होते हैं। रानी दीमक का काम केवल अंडा देना है वह दिन रात एक गति लगातार अंडे दिया करती है। कुछ वैज्ञानिकों का कथन है कि वह 60 अंडे प्रति मिनट देती है। इस तरह वह 24 घण्टे में 86 हजार अंडे देती है ज्यौ ज्यौ वह अण्डे देती है श्रमिक दीमक उन अण्डों को उठाकर विशेष कमरों में रखती है। अंडों से बच्चे 24 से 90 दिनों में निकलते है यह समय अनेक परिस्थतियों पर आधारित है।

 

दीमक का प्रमुख भोजन
दीमक का मुख्य भोजन है लकड़ी, फसलें, पत्तियां, पौधें, घास अथवा पेड़ पौधों से निकली वस्तुऐं। दीमक लकड़ी खाती अवश्य है, परन्तु वह स्वयं उस लकड़ी को पचा नहीं सकती। लकड़ी पचाने के लिए वह अपने आमाशय में एक विशेष जाति के एककोशीय जीवों को रखती है। श्रमिक दीमकें अपने मूंह से एक प्रकार का तरल पदार्थ पैदा करती हैं, जिसे बच्चे अथवा सिपाही खाते हैं। कुछ दिमकें अपनी बस्तियों में फफूंदी की खेती करती हैं और उनके बीजाणुओं को रख लेती हैं तथा जब जी चाहा खाती हैं। इस भोजन को वे उस समय खाती हैं, जब उन्हें वर्षा या अन्य कारणों से भोजन के लिए बाहर जाने का अवसर नहीं मिलता। दीमक मानवोउपयोगी वस्तुओं की भयानक शत्रु हैं। ये लकड़ी और चमड़ें की वस्तुओं को बुरी तरह से खा जाती है। कुर्सी, मेज, किवाड, खिड़की, खपरैल की बल्लियां आदि ये प्रायः नष्ट कर डालती हैं। दरी, कंबल, कालीन तथा किताबें आदि भी इससे नहीं बच पाती है। यह किसी भी चीज को बाहर से खाना आरम्भ नहीं करती है यह अन्दर से खाकर खोखला कर डालती है। कुछ दीमकें ऐसी भी है अवकाश मिलने पर धातु की बनी वस्तुऐं भी खा डालती है। पहले पेड पौधों को तो दीमकें खाती थी अब तो फसलों को भी खाने लगी है।

 
1. खेत में सूखी लकड़ी गाडकर
फसलों को दीमक से बचाने के लिए सफेदे, यूकलिप्टस या अन्य सूखी लकड़ी के दो फुट लम्बे दो इंच मोटे टुकडों को फसल के बीच में जगह-जगह रखने पर फसल को दीमक नहीं लगती है। सफेदे की लकड़ी को दीमक ज्यादा लगती हैं इसलिए विभिन्न स्थानों पर रखे इस लकड़ी के टुकडों में दीमक लग जाने से फसल बच जाती है। सफेदे के टुकडे़ खरीदने के लिए एक बार करीब तीन सौ रूपये खर्च होते हैं जो तीन फसलों तक काम आते है।
कृषि विज्ञानियों ने भी वर्षों तक प्रयोग करने के बाद दीमक से बचाव का यह प्रभावी उपाय माना हैं।

 

2. भुट्टे की गिण्डयों से दीमक प्रबन्धन 

आवश्यक सामग्री: मक्का भुट्टे की गिण्डयां (8-10) मिट्टी का घड़ा (मटका) , सूती कपड़ा
विधि:

  • मक्का के भुट्टे से दाने निकलने के बाद जो गिण्डयां बचती हैं, उन्हें (8-10) गिण्ड़ी एक मिट्टी से निर्मित घडे़ में एकत्रित कर लें। इस घड़े को खेत में इस प्रकार गाड़े कि घड़े का मुंह जमीन से एक इंच ऊपर निकलें।
  • घडे  के मुंह पर छिद्रदार सूती कपड़ा बांधें।
    कुछ दिनों में ही आप देखेंगें कि घड़े में दीमक भर गयी हैं। इसके बाद घडे़ को बाहर निकालकर गरम करें
  • ताकि दीमक मर जाये।
  • इस प्रकार के घड़े को खेत में 100-100 मीटर की दूरी पर गाढ़ दें तथा करीब 3-4 बार गिण्डिया बदलकर यह क्रिया दोहराने से खेत की पूरी दीमक समाप्त हो जायेगी।
    नोट:
  • जिन खेतों में दीमक की अधिक समस्या होती है वहां बुवाई के पूर्व 2 लीटर देशी गाय के मठ्ठे में चने के दाने के बराबर 6 हींग के टुकडे़ पीसकर घोलने के बाद, उस घोल को ठीक तरह से पूरे खेत पर छिड़ककर दो घंटे के बाद बुवाई करनी चाहिए।
  • मिट्टी का तेल या केरोसिन तेल से बीजों का उपचार करके बुवाई में प्रयोग करें। यह शत् प्रतिशत सफल प्रयोग है। इस विधि से फसल काटने तक दीमक का प्रकोप नहीं होगा।
  •  जले हुये आॅयल से बीजोपचार करने से भी दीमक के प्रकोप से बचा जा सकता है।
  •  मिट्टी का तसला लें, जिसमें ताजा गोबर भरकर खेत के बीचों बीच जमीन के लेबल में शाम के समय गाड़ दें। गोबर दीमक का प्रिय भोजन होता है, खेत की सभी दीमक गोबर खाने तसले में जाएंगी और सुबह सूर्योदय होने से पहले वहां से उठाकर किसी दूसरी जगह नष्ट कर दें। इस तरह 4-5 दिन करने से खेत से दीमक का प्रकोप खत्म हो जायेगा।
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