भिंडी के प्रमुख रोग और उनका प्रबंधन कैसे करें

1. पीला शिरा रोग –

लक्षण – यह रोग विशेषकर पौधे की नई पत्तियों पर शुरू होता है। इस रोग से प्रभावित पौधों में पत्तियों के शिरायें पीली पड़ जाती है। पहले यह पत्ती की मुख्य शिराओं में दिखता है लेकिन धीरे-धीरे प्रकोप बढ़ने पर यह सम्पूर्ण पत्ती में फैल जाता है जिससे पत्तियों का हरापन समाप्त हो जाता है। फलस्वरूप फल छोटे, कम व पीले बनते है। यह रोग भिंडी में सफेद मक्खी के द्वारा फैलता है।
प्रबंधन -खेत में उपस्थित सवंमित, पीले पौधों को उखाड़कर जला देनी चाहिए।

2. चूर्णिल आसिता –

लक्षण – इस रोग के प्रथम लक्षण पुरानी पत्तियों पर पाये जाते है। सबसे पहले धूसर स्वेत चूर्ण के रूप में पत्तियों की बाहरी त्वचा पर पाया जाता है और धीरे-धीरे यह पौधे के हरे भाग को पूर्णतया ढक लेता है। इससे सवंमित पत्तियां पीली होकर सूख जाती है तथा समय से पहले पौधे से झड़ जाती है। प्रकोप अधिक होने पर पूरा पौधा मर जाता है।
प्रबंधन – आवश्यकता पड़ने पर सल्फर धूल का 25 किलोग्राम प्रति हेक्. की दर से खेत में छिड़काव कर सकते है।

भिंडी का प्रमुख सूत्रकृमि एवं उसका प्रबंधन – bhindi ki fasal ka kit prabandhan

1. मूल ग्रन्थि सूत्रकृमि

पहचान – प्रौढ़ मादा नाशपाती की शक्ल की तथा सफेद रंग की होती है। नर का स्टायलट मादा से बड़ा होता है। प्रत्येक मादा लगभग 500 अंडे देती है तथा एक जीवन -चक्र लगभग 30-40 दिन में पूरा होता है। जड़ो के अन्दर प्रौढ़ नर या मादा बनने के लिये कृमि शिशुओं का विकास होता रहता है। एक ही फसल की अवधि में दो या दो से अधिक पीढियां हो सकती है।

क्षति के प्रकार –

इस सूत्रकृमिक के आक्रमण से पौधों के जड़ फल कर गांठ जैसे बन जाती है। ग्रसित पौधों की पत्तियां पीली पड़ जाती है। ऐसी जड़ों में एक से अधिक प्रौढ़ मादा सूत्रकृमि हैं। कभी-कभी जड़ों में दरार पड़ जाती है। जिससे फफूंदी, जीवाणु तथा सड़े गले पदार्थो पर पलने वाले सूत्रकृमि का आक्रमण होने से जड़े सड़ने लगती है। अततः पौधे मर जाते हैं।
भिंडी में पत्तियों का पीला पड़ना तथा किनारों का जला हुआ दिखायी पड़ना इस सूत्रकृमिक  का प्रमुख लक्षण है।

प्रबंधन –

  • उचित फसल चक्र अपना कर इसके प्रकोप को कम किया जा सकता है।
  • गर्मियों में खेत की 2-3 बार गहरी जुताई करके मिट्टी को अच्छी तरह सूखा देना चाहिए।
  • भिंडी के खेत में 250 कि.ग्रा. प्रति हेक्. की दर से नीम की खली का प्रयोग करना लाभदायक होता है।
Loading...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *