आंवला की खेती कर अधिक मुनाफा तथा लाभ लें

भूमि – आंवला की खेती बलुई मिट्टी के अलवा यह सभी प्रकार की मृदा में आंवला की खेती की जा सकती हैं। सामान्य मिट्टी तथा ऊसरीली मिट्टी में इसका पी.एच. मान 9 तक पहुँच जाता है। इस प्रकार कि मिट्टियों में पी.एच आँवला की खेती की जा सकती है।

गड्ढे की खुदाई और भराई –

आंवला खेती ऊसर भूमि में भी किया जा सकता है तथा इसे मई-जून में 80-10 मी. की दूरी पर 1-2 मीटर आकार के गड्ढे खोद कर लगा देना चाहिए। कड़ी परत और कंकड़ की तह हो तो उसे खोद कर अलग कर लेने चाहिए। बरसात के मौसम में इन गड्ढों में पानी भर देना चाहिए। प्रत्येक गड्ढे में 60-70 कि.ग्रा. गोबर की खाद, 14-17 कि.ग्रा. बालू 8-10 कि.ग्रा. पाइराईट मिलाना चाहिए। गड्ढे भरने के समय 60-90 ग्राम क्लोरोपायरीफास धूल भी भर देना चाहिए। भराई के 20-25 दिन बाद अभिक्रिया समाप्त होने पर ही पौधों का रोपण किया जाना चाहिए व सामान्य भूमि में प्रत्येक गड्ढे में 30-40 कि.ग्रा सड़ी गोबर की खाद, 100 ग्राम नत्रजन, फास्फोरस और पोटाश का मिश्रण 15 के अनुपात में देना आवश्यक होता है। इसके आलवा 250-500 ग्रा. नीम की खली $100-150 ग्राम, क्लोरोपाइरीफास डस्ट मिलाना अनिवार्य होता है। गड्ढे जमीन की सतह से 20-22 सेमी. उँचाई तक भरना चाहिए।

आंवला की व्यावसायिक किस्में – Commercial varieties of Amla in Hindi

आँवला की व्यावसायिक किस्में में फ्रान्सिस, कृष्णा, चकैया, कंचन नरेन्द्र, आँवला-4 नरेन्द्र आँवला-7,  तथा गंगा बनारसी है। व्यावसायिक किस्में- चकैया एवं फ्रान्सिस से काफी लाभार्जन होता है।

खाद एवं उर्वरक –

आँवला अच्छी बागवानी के लिये प्रति वर्ष 80 ग्राम नत्रजन, 50 ग्राम फास्फोरस तथा 75 ग्राम पोटाश प्रति वर्ष पेड़ की दर से देते रहना चाहिए। खाद एवं उर्वरक की मात्रा हर दस वर्ष तक बढ़ाते रहना चाहिए। ऊसर भूमि में जस्ते की कम के लक्षण दिखाई पड़ते है। अतः 2-3 वर्ष उर्वरकों के साथ 300-400 ग्रा जिंक सल्फेट फल वाले पौधों में देना चाहिए।

सिंचाई-

आँवला के नवरोपित बागों में गर्मी के मौसम में दस दिन के अन्तराल पर पेड़ों की सिंचाई करते रहना चाहिए और फल वाले भागों में जून माह में एक बार पानी देना आवश्यक है। फूल आते समय बागों में किसी तरह से पानी नहीं दिया जाना चाहिए। समय-समय खरपतवार निकालने हेतु थालों की गुड़ाई करना अत्यंत आवश्यक है।

आंवला से अधिक फल लेने के सुझाव-

1. बागों सही तरह से देख-रेख करें।
2. पौधो को सम्पूर्ण पोषण दें।
3. सितम्बर माह में 0.6 प्रतिशत यूरिया, 0.5 प्रतिशत एग्रोमिन एवं 0.5 प्रतिशत पोटैशियम सल्फेट का छिड़काव करें।
4. फलों के मौसम में एक माह के अन्तराल पर डाइथेन 0.3 प्रतिशत तथा मैटासिस्टाॅक्स 0.03 प्रतिशत के छिड़काव अच्छे होते है।
5. अगर पेड़ो में ब्रोराॅन तत्व की कमी दिखाई दे तो 50 ग्राम बोरेक्स प्रति पेड़ देना चाहिए।
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