आडू की खेती कर अच्छी आमदनी लें!!

आडू एक असाधारण मणि फल फसल है। जो मुख्य रूप से ठंडे क्षेत्र में शीतष्णकटिबंधन क्षेत्र में खेती की जाती है। आडू एक पर्णपाती पेड़ जिसका रसदार फल आडू लाल, गुलाबी, पीला, सफेद आदि रंगो का होता है। इसकी मुख्य रूप से खेती जम्मू-कश्मीर, मेघालय, उत्तराखंड, सिक्किम आदि जैसे राज्यों में किया जाता है। भारत में आडू की खेती सबसे अधिक होता है। पहाड़ी क्षेत्रों में गुणवत्ता वाली आडू की खेती का उत्पादन किया जाता है। अपने उत्तम स्वाद और आकर्षक रंग के कारण आडू ताजे खाने वाले फलों में शीर्ष स्थान पर माना जाता है। अब इसे कम ठंडे वाले स्थान तथा मैदानी क्षेत्रों में इसे उगाया जा सकता है। हांलाकि आडू के कई किस्में है। मुख्य रूप से इस फल का अधिकांश तेल की खेती के लिये भी किया जाता है। इसका तेल मुख्य रूप से काॅस्मेटिक उत्पादों के लिये भी किया जाता है। इस फल का प्रयोग कई औषधीय उत्पादों के तैयार करने में भी किया जाता है। हांलाकि उन्नत कृषि तकनीक और प्रौद्योगिकी के साथ दुनिया भर में आडू की खेती को बढ़ाना आवश्यक है। पूरी दुनिया में चीन आडू के फल का सबसे बड़ा उत्पादक है।

पोषक तत्व –

मुख्य रूप से इसमें आवश्यक तत्व पाये जाते है जैसें- फ्लोराइड, पोटैशियम, प्रोटीन, नायसिन, विटामिन बी, राबोफलेविन, थाइमिन, फाॅस्फोरस तथा एंटीआक्सीडेंट और कुछ जैव रासायनिक तत्व इस फल के साथ मौजूद होते है।

आडू फल खाने से स्वास्थ लाभ- aadu ke fayde or Peach fruit health benefits in Hindi

  • आडू फल का सेवन करने से उम्र का असर को बेअसर कर देता है। आडू फल में मौजूद एंटीआक्सीडेंट होते है जो वृद्धावस्था की प्रक्रिया को कम करने में सक्षम होते है।
  • आडू फल खाने से आंख की दृष्टि क्षमता बढ़ता है साथ ही आंख भी स्वस्थ रहता है।
  • आडू त्वचा और स्वास्थ्य के लिये अच्छा माना जाता है। यही कारण है इससे काॅस्मेटिक वस्तुओं को भी तैयार किया जाता है।
  • आडू से बने फेस पेक लगाने से चेहरा चमकदार और कोमल बनता है तथा त्वचा को स्वास्थ बनाने में मदद करता है।
  • आडू फल खाने से अम्लरक्ता, रक्ताल्पता, दमा, मूत्रालय, और गुर्दे की पथरी ब्रोंकाइटिस, कब्ज, सूखी खांसी जठर शोथ, उच्च रक्तचाप आदि में लाभकरी है।
  • आडू फल कैंसर और उच्च कोलेस्ट्राॅल को भी नियंत्रित करने में सहायक होती है।

पूरी दुनिया में 300 से अधिक प्रकार के आड़ू के किस्में मौजूद है। जिनके उपयोग व्यावसायिक खेती के लिए किया जाता है। हालांकि इनमें से प्रत्येक के पास अलग-अलग बढ़ते क्षेत्र में अलग.अलग पैदावार क्षमता है। यहां कुछ लोकप्रिय आड़ू की किस्मे है जो बाजार की मांग को पूरा करने के लिए सबसे ज्यादा उगाई जाती है। जैसे- पीला पीच, सफेद पीच, फ्रीस्टोन पीच, क्लिंगस्टोन पीच, डोनट पीच, आदि है।
चूंकि यह फसल एक ठंडा मौसम और समशीतोष्ण फसल है। उन्नत कृषि तकनीकों के साथ जलवायु की एक विस्तृत श्रृंखला पर आडू फलों की फसल पैदा करना संभव है। अन्य फलों की तुलना में इन फलों के पेड़ गर्म और गर्म जलवायु स्थितियों के लिए कुछ सहनशील होते हैं।
हालांकि आड़ू फल को फलने के समय एक स्पष्ट साफ और गर्म वातावरण की आवश्यकता होती है। इसके अलावा इस चरण के दौरान एक न्यूनतम अस्थायी है।

आडू फसल की खेती के लिए मृदा आवश्यकता – Organic peach fruit cultivation in hindi

विभिन्न प्रकार की मिट्टी पर आडू की खेती की जा सकती है। हालांकि ये अपनी गहरी और लोमी मिट्टी में अपना सर्वश्रेष्ठ पैदावार दे सकता है।
चूंकि यह फसल पानी के ठहराव के लिये यह बहुत अच्छा माना जाता है। इसलिए इस फल फसल को भी एक अच्छी आंतरिक मिट्टी जल निकासी की आवश्यकता होती है। गुणवत्ता और सर्वोत्तम आड़ू बनाने के लिए इन्हें उच्च पहाड़ियों के तलहटी और एक मध्य पहाड़ी पर भी खेती कर सकते है।

आडू की खेती के लिए भूमि की तैयारी – aadu ki jaivik kheti in Hindi

आडू की खेती के लिये एक गड्ढे को दूसरे से अलग 5 मीटर पर 0.75 मीटर गुणा 0.75 मीटर गुणा 0.75 आयाम में खोदें। फिर आड़ू के 150 ग्रा. यूरिया, 150 ग्रा. एमओपी 300 ग्रा. क्लोरोप्रिफोस के साथ लगभग 25 कि.ग्रा. खाद को आडू की खेती में प्रयोग करे। जिससे पौधे का अच्छा विकास हो।

आडू का बीज का कैसा संयंत्र हो- aadu seeds in Hindi

बीज के माध्यम से आड़ू लगाने के लिए बीज को 4 इंच की गहराई पर एक गड्ढे में लगाएं और फिर इसे लगभग 1-2 इंच गहराई के साथ ढ़क दें। गड्ढे में बीज लगाने के बाद पानी डालें। फिर पौधे की जरूरत के आधार पर पानी दें। कुछ समय बाद बर्तन में एक बीजिंग दिखाई देगी।
हालांकि आड़ू खेती यह फसल मुख्य रूप से ग्राफ्टिंग और रूटस्टॉक विधि द्वारा होता है।

रूटस्टॉक विधि-

चयनित बीज को नमकीन रेत में लगभग 100 दिनों तक संदूषण के लिए रखें। उसके बाद 250 मि.ग्रा. प्रति लीटर पानी और थियौरा 10 ग्राम प्रति लीटर पानी के साथ अंकुरण और शक्ति को बढ़ाने के लिए बीज का उपचार करें।
फिर इन बीजों को तैयार सीड-बेड गहराई से बोएं 5 से 6 सेमी एक दूसरे से अलग 15 सेमी पर बोएं। पंक्ति को 15 से 20 सेमी होना चाहिए। इसके के लिये सबसे अच्छा समय अक्टूबर से नवंबर तक है। सीड-बेड पर रोपण के बाद ही एक हल्की सिंचाई दें।

ग्राफ्टिंग विधि-

वृक्षारोपण के इस तरीके में क्षेत्र से लगभग 25 सेमी तथा 12 महीने पुराने रूटस्टॉक से 5 से.मी. ग्राफ्ट में कटौती करता है। फिर इसे तैयार गड्ढे में लगा देना चाहिए। इसके बाद ग्राफ्ट किये गये। रूटस्टॉक की अच्छी सेटिंग के लिए एक हल्की सिंचाई करनी चाहिए।

रोपण विधि –

मानसून के मौसम शुरू होने से पहले जून से अगस्त तक आड़ू लगाने के लिए सबसे अच्छा मौसम है और वृक्षारोपण के बाद एक सिंचाई करना चाहिए। हालांकि इस फसल की सिंचित क्षेत्रों में वृक्षारोपण दिसम्बर-जनवरी के अंत में किया जाता है।

आडू की खेती और सिंचाई –

मुख्य क्षेत्र पर बीज लगाने के बाद पहली सिंचाई दें। हालांकि बरसात के मौसम में किसी भी सिंचाई की कोई आवश्यकता नहीं है।
इसके अलावा ड्रिप सिंचाई के साथ पौधों को पानी देने का सबसे अच्छा तरीका है। और इसमें सिंचाई की पारंपरिक विधि पर कई फायदे हैं।

खाद और उर्वरकों के उपयोग

प्रथम वर्ष में फार्म यार्ड मैन्योर 5 कि.ग्रा., 250 ग्रा. यूरिया, सिंगल सुपर फास्फेट 250, तथा 200 ग्रा. म्यूरेट आॅफ पोटाश दे।
द्वितीय वर्ष में फार्म यार्ड मैन्योर 10 कि.ग्रा., 500 ग्रा. यूरिया, सिंगल सुपर फास्फेट 250, म्यूरेट आॅफ पोटाश 300 ग्रा. दंे।
पांच साल के ऊपर के पौधे को फार्म यार्ड मैन्योर 30 कि.ग्रा., 1250 ग्रा. यूरिया, सिंगल सुपर फास्फेट 1250, म्यूरेट आॅफ पोटाश 600 ग्रा. दंे।

आडू खेती में खरपतवार नियंत्रण – How to control Weeds in peach cultivation

मुख्य क्षेत्र पर लगभग एक महीने के बीज बागान के बाद एक मैनुअल वेडिंग किया जाना चाहिए। हालांकिए इस फसल के लिए एक प्रभावी खरपतवार को छिड़कना फसल में खरपतवारों को नियंत्रित करने का सबसे अच्छा तरीका है।

आडू की खेती में इंटरक्रॉपिंग-

इंटरक्रॉपिंग के साथ आप अपने क्षेत्र में खाली स्थान का उपयोग करके अतिरिक्त आय बना सकते हैं। निम्नलिखित कुछ फसलें हैं जो आड़ू के फलों के पौधे के साथ इंटरक्रॉपिंग के लिए सबसे उपयुक्त हैं। जैसें- मिर्च खेती, अदरक खेती, उरद दल खेती, हरी मटर खेती, सोयाबीन खेती
हालांकिए कोई भी आड़ू फलों की फसल के साथ इंटरक्रॉपिंग के लिए किसी भी अन्य सब्जी फसलों के लिए जा सकता है। लेकिन पौधों को फल देने से पहले किसी भी तरह से इंटरक्रॉप करें।
आडू के पेड़ पर लगने वाले कुछ मुख्य कीट है जैसे- ओरिएंटल फल मॉथ, पीच्री बोरर, चूसने कीड़े, बेर कर्क्यूलीओ
नोट- कीटों और आड़ू के पेड़ों की बीमारियों को नियंत्रित करने के लिए अपने स्थानीय बागवानी विभाग से एक बार परामर्श जरूर लें।

फसल कटाई- aadu ki fasal katai

फलों की कटाई के लिये जब ये कठोर त्वचा के साथ अच्छे रंग में दिखाई दे तभी इनका तुड़ाई करे और अपने विक्रय के आधार पर इन्हे सही समय पर चुनें। उन्हें स्थानीय बाजार में बेचने के लिएए पूरी तरह परिपक्व होने पर फलों की तुड़ाई करनी चाहिए। इन्हें दूर बाजार में निर्यात करने के लिए इन फलों को फसल लें इससे पहले कि वे पूरी तरह पके हों। कटाई या पैकिंग के लिए सबसे अच्छा समय अप्रैल से मई मे होता है।

आडू की खेती की पैदावार –

फसल पैदावार के लिये मिट्टी के प्रकार पर निर्भर करता है तथा मुख्य रूप से देखभाल पर निर्भर करता है। हालांकि औसत दो वर्ष या तीन वर्ष के आड़ू के पेड़ से प्रति 30 किलो से अधिक फल एकत्र कर सकता है।

Loading...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *