मोहिनी एकादशी व्रत की कथा और फायदे !!

मोहिनी एकादशी के बारे में हम आपको इस लेख में बताने जा रहे हैं। ये एकादशी वैशाख शुक्ल में आती है। श्री कृष्ण को ये एकादशी बहुत प्रिय है। इस व्रत की कथा के बारे में हम आपको बता रहे हैं। चलिए जान लेते हैं।श्री कृष्ण भगवान से एक बार युधिष्ठिर जी ने पूछा प्रभु आप वैशाख मास की शुक्ल पक्ष में आने वाली एकादशी के बारे में बताएं। और इस व्रत की कथा और महत्व के बारे में समझाएं। तब भगवान श्री कृष्ण ने इस बारे में पूरी बात धर्मराज से कही।

मोहिनी एकादशी व्रत की कथा-mohini ekadashi vrat katha in hindi

एक समय पुरानी बात है एक राजा था। जिसके कई पुत्र थे। लेकिन उन पुत्रों में से एक पुत्र बहुत ही व्यभिचारी था। वो अक्सर दुर्जनों की संगति में रहता था। और हर वक्त अपने से बड़ों का अपमान किया करता था।

राजा को इस बात का बहुत दुख था और उसने अपने इस बेटे को अपने राज्य से बाहर निकाल दिया। अब वो लड़का जंगलों में रहने लगा। आसुरी गुणों के आने की वजह से वो लड़का जानवरों और पशु—पक्षियों को मारकर खा जाता था यानि की वह एक बहेलिया बन गया था। हर समय उसके हाथों में धनुष वाण होता था। वह एक दिन जंगल में घूमते हुए एक आश्रम में पहुंच गया। वहां वो जब ऋृषियों की संगती में रहने लगा तब वह अपना महत्व समझ गया।

अच्छे आचरण सीखने और अच्छी संगति में आकर वह सत्संगति का महत्व सीख गया। और फिर अपने किए हुए पापों पर उसे पछतावा भी हुआ।
इस समस्या को जानकर आश्रम में रहने वाले ऋृषि ने उसे वैशाश शुक्ल एकादशरी का व्रत करने को कहा। उस राजकुमार ने माहिनी एकादशी का व्रत किया और इस व्रत के प्रभाव से उसकी  बुद्धि शांत और निर्मल हो गई। और उसे पाप नष्ट हो गए। इस तरह से जो इंसान मोहिनी एकादशी का व्रत नियम के अनुसार करता है उसके पाप भगवान  खुद काट देते हैं। इसलिए इस व्रत को आज भी लोग श्रद्धा के साथ करते हैं।

Loading...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *