कार्तिक पूर्णिमा का महत्व और उपाय

वैदिक धार्मिक ग्रंथों के अनुसार पूरे साल में हर माह एक पूर्णिमा आती है। यानि साल में 12 पूर्णिमाएं आती हैं। उनमें से सबसे अधिक महत्व वाली होती है कार्तिक पूर्णिमा। इसे कई नामों से भी जाना जाता है जैसे गंगा स्नान पूर्णिमा, कार्तिक स्नान और त्रिपुरी पूर्णिमा। महादेव ने इस दिन में त्रिपुरासुर नामक राक्षस का अंत किया था इस कारण से इस दिन को त्रिपुरी पूर्णिमा भी कहा जाता है। श्री हरि विष्णु जी ने धरती के कल्याण के लिए इस दिन में अपना मत्सयावतार लिया था। इस पर्व के बारे में हमें नारद पुराण, स्कन्द पुराण और पद्म पुराण में पूरी जानकारी मिलती है।

दोस्तों इस दिन में दीप, दान आदि का विशेष महत्व होता है। यही नहीं ये खास पर्व सिक्खों के गुरू नानक के जन्म के रूप में भी मनाया जाता है।

इस दिन के वि​शेष उपाय (kartik purnima ka upay)

भगवान श्री कृष्ण को ये दिन अति प्रिय है। इसलिए इस दिन स्नान करने इंसान को एक हजार बार गंगा स्नान करने के बराबर फल मिलता है। साथ ही उसे कुंभ के दौरान प्रयाग में किए गए स्नान के बराबर भी फल मिलता है। वैदिक शास्त्रों में महाकार्तिकी भी इसे कहा गया है। एैसा इसलिए कहा गया है ​क्योंकि भगवान विष्णु जी अपनी योगनिंद्रा से कार्तिक शुक्ल एकादशी को उठते हैं। और इस दिन से अपने काम पर लग जाते हैं।

जैसा की आपको बताया गया है कि इस दिन दान, दीप, स्नान आदि के अलावा यज्ञ आदि का महत्व है। जो इंसान इस दिन गरीब लोगों को अन्न, धन और वस्त्र दान करता है उसे समस्त पापों से छुटकारा मिल जाता है। साथ ही वह इंसान स्वर्ग में अपनी जगह भी बनाने में सफल हो जाता है।

शाम के समय में इस दिन तुलसी, पपील, घर व मंदिर और नदी में दीपदान करने से इंसान के जीवन में कभी अंधेरा नहीं होता है।

अपने घर पर आप यदि इस दिन दीप जलाते हैं तो इससे मां लक्ष्मी की आपके उपर विशेष कृपा होती है। साथ ही घर में सुख, शातिं
और सौभाग्य भी आता है।

आप जरूर इस दिन स्नान करने के बाद सत्यनारायण व्रत की कथा को जरूर सुनें। इससे आपको अक्षय पुण्य की प्राप्ती होगी।

कार्तिक पूर्णिमा (kartik purnima) की पूजा की विधि क्या है

आपको इस दिन में पूजा आदि की विधि के बारे में भी जानकारी होनी चाहिए।
सुबह जल्दी उठकर आप नहाने की बाल्टी में गंगा जल भरकर उससे स्नान करें। यदि संभव हो तो गंगा में स्नान जरूर करें।
व्रत जरूर रखें इस दिन।
लवण यानि नमक का सेवन नहीं करें इस दिन।
गरीब और ब्राह्मणों को दान करें।
और रात के समय चंद्रमा को जल चढ़ाएं।

इस तरह से ये दिन हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है। नियम और विशवास से आपको जरूर इसका फल मिलता है।


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