कृषि पर्यटन-एग्रो टूरिज्म किसानो को अच्छा लाभ दे सकता है

कृषि पर्यटन वास्तविक ग्रामीण जीवन का अनुभव कराता है तथा स्थानीय वास्तविक भोजन का स्वाद लेना और विभिन्न खेती कार्यों से परितिच होना कृषि पर्यटन कहलाता है। यही कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है यह लगभग 85 प्रतिशत आबादी सीधे या परोध रूप से कृषि पर निर्भर है और भारत के सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 26 प्रतिशत कृषि से आता है तथा 90 प्रतिशत किसान 25 लाख गांवो में रह रहे है। जो देश को खिलाते हुए 200 मिलियन टन अनाज का उत्पादन करते है। यह एक पेशे का व्यवसाय है जो ज्यादा कृषि भारत की संस्कृति है। इसलिए मौजूदा कृषि के अतिरिक्त आय पैदा करने वाली गतिविधियों को जोडने से राष्ट्रीय जीडीपी निश्चित रूप से कृषि के योगदान में वृद्धि हुई है।

कृषि पर्यटन (एग्रो टूरिज्म) रोजगार का एक नया क्षेत्र

इस दिशा में गंभीर प्रयास किये जाने की जरूरत है। कृषि पर्यटन को बढ़ावा देना के लिये सरकार पूर्ण रूप से अग्रणी है तथा पर्यटन को रोजगार सृजन गरीबी उन्मूलन और टिकाऊ मानव विकास के लिये एक उपकरण कहा जाता है। 1999-2000 के दौरान पर्यटन द्वारा प्रत्यक्ष रोजगार मिला है। इसके अलावा पर्यटन राष्ट्रीय तथा अन्तर्राष्ट्रीय समझ को बढ़ावा देता है और हस्तशिल्प और सांस्कृतिक गतिविधियों का समर्थन करता है। वर्ष 2000 के दौरान भारत में आने वाले विदेशी पर्यटकों की संख्या 26-41 लाख थी।

 

घरेलू पर्यटन में कारोबार बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार द्वारा पहचाने वाले प्रमुख क्षेत्रों में बुनियादी ढांचा तैयार कर रहा है । उत्पाद विकास और पर्यावरण साहसिक खेल के विकास एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का विकास सस्ती आवास प्रदान कराना एवं हवाई अड्डों पर सुगम प्रक्रियाएं सुगम बनाने मानव संसाधन विकास जागरूकता पैदा करना और सार्वजनिक निजी क्षेत्र में अपना भागीदारी और सुविधा में हितधारक राज्य और केन्द्रीय पर्यटन विभाग, भारतीय पर्यटन संस्थान और पर्यटन प्रबंधन, पर्यटन विकास निगम, विदेशी दूतावास, भारतीय ट्रैवल एजेंटस् एसोसिएशन, पर्यटन परिवहन आॅपरेटर तथा ट्रैवल एसोसिएशन इस दिशा में कार्य कर रहे है।

 

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