जैविक निंबोली सत् एक सस्ता कीटनाशक है इसका कैसे प्रयोग करें

भारत एक कृषि प्रधान देश है और लगातार भारत में अनाज का उत्पादन बढ़ रहा है। लेकिन यदि अनाज को सही तरह से ना रखा जाए तो उसमें कीड़े, घुन औश्र फंफूद आदि लगने का खतरा बढ़ जाता है । एैसे में यदि रसायनिक कीटनाशी का प्रयोग किया जाए तो यह इंसान की सेहत के लिए एक बड़ा खतरा बन सकता है। साथ ही इससे अन्न की पौष्टिकता में भी कमी आ सकती है। इस लेख में हम अपने किसान भाईयों और बहनों को नीम की निबौली से जैविक निंबोली सत् को बनाने और उसके प्रयोग की विधि बता रहे हैं।

जैविक निबौली सत् कीटनाशक बनाने की विधि- how to make organic nimboli for Pesticides in Hindi

बनाने की विधि-(jaivik nimboli khad banane ki vidhi)

 

नीम की पकी हुई निंबोली को एक रात के लिये पानी में भिगोकर रख देते है। भीगी हुई निंबोली को किसी लकड़ी के डंडे से चलाते है। ऐसा करने से निबौली का छिलका और गूदा अगल हो जाता है तथा बीज नीचे बैठ जाता है।

बीजों को पानी से निकाल कर छाया में सुखा लेते है। बीजों को तोड़कर उसमें से निंबौली को निकाल लेते है। सूखी हुई निंबोली को हाथ की चक्की या ओखली में बारीक पीसकर पाउडर बना लेते है। इस पाउडर को बारीक कपड़े में पोटली बनाकर शाम को पानी में भिगों दें। सुबह पोटली को दबा, दबा कर सफेद दूधिया रस निकाल लें। तथा शेष बचे पदार्थ को फेंक दे। इस निकले घोल में 1 प्रतिशत कोई सस्ता साबुन मिलाकर फसल पर 5 प्रतिशत निंबौली सत् का छिड़कावल कर सकते है।

निंबोली सत् बनाने की विधि-

पहले निंबोली ले उसके बाद बारीक कूट लें। फिर कपड़े में बांधकर शाम को पानी में भिगो दें। उसके बाद सुबह कपड़े को दबा-दबा कर सफेद दूधिया रस निकाल लें। अब इसमें 1 प्रतिशत कोई भी सस्ता साबुन मिला दें। इसके बाद निंबोली सत् को 5 प्रतिशत के दर से छिड़काव करें तथा एक हेक्. के लिये 5 प्रतिशत घोल तैयार करने हेतु आवश्यक मात्रा में 25 कि.लो ग्राम निंबौली को 500 ली. पानी में 5 कि.लो साबुन की आवश्यकता होती है।

नीम तथा इसके गुण-

  •  सबसे पहले तो यह लाभदायक कीटों को सुरक्षित करता है।
  •  इसका प्रयोग समेकित नाशीजीव प्रबंधन में व स्व अवयव के रूप में किया जाता है।
  •  यह सस्ता, सुरक्षित एवं आसानी से उपलब्ध हो जाता है।
  •  इसके प्रयोग से पर्यावरण सुरक्षित रहता है।
  •  छिड़काव करने वाले व्यक्ति के स्वास्थ पर काई बुरा प्रभाव भी नहीं पड़ता है।
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